करीब 25 साल पहले की बात है. कानपुर के एक घर में नरेंद्र मोदी पहुंचे थे. उस वक्त न वह प्रधानमंत्री थे और न किसी राज्य के मुख्यमंत्री. संघ और भाजपा के संगठनात्मक काम से जुड़े एक प्रचारक के तौर पर वह कानपुर आए थे. इसी दौरान उन्होंने गोपी कृष्ण पाण्डेय के घर बाल कटवाए. बाद में कार्यकर्ताओं के साथ सनी देओल की फिल्म 'ग़दर' देखने भी चले गए.
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अब ढाई दशक बाद उसी घर से जुड़ी ये पुरानी घटना फिर चर्चा में है. वजह है गोपी कृष्ण पाण्डेय का राज्यसभा के लिए भाजपा उम्मीदवार बनना. उत्तर प्रदेश से पार्टी ने जिन नामों का ऐलान किया है, उनमें कानपुर के गोपी कृष्ण पाण्डेय भी शामिल हैं.
कौन हैं गोपी कृष्ण पाण्डेय?
गोपी कृष्ण पाण्डेय लंबे समय से भाजपा के संगठनात्मक ढांचे से जुड़े रहे हैं. उनकी पहचान चुनावी राजनीति के किसी बड़े चेहरे के तौर पर नहीं, बल्कि संगठन के लिए लगातार काम करने वाले कार्यकर्ता की रही है.
कानपुर में बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने से लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और पार्टी की जिम्मेदारियों को जमीन पर लागू करने तक वह संगठन के अलग-अलग कामों से जुड़े रहे हैं.
सार्वजनिक मंचों और मीडिया की सुर्खियों से दूर रहने के बावजूद पुराने भाजपा-संघ कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पहचान रही है. कानपुर से भाजपा ने इस बार प्रकाश पाल और गोपी कृष्ण पाण्डेय को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है.
2001 में कानपुर पहुंचे थे नरेंद्र मोदी
गोपी पाण्डेय का नाम सामने आने के बाद 2001 की वह घटना भी फिर याद की जा रही है.
वरिष्ठ पत्रकार श्रीधर अग्निहोत्री के अनुसार, 3 जुलाई 2001 को कानपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारकों की बैठक होनी थी. इसी सिलसिले में नरेंद्र मोदी कानपुर पहुंचे थे. उस समय वह संघ के प्रचारक और भाजपा के संगठनात्मक काम से जुड़े नेता थे.
कानपुर आने के बाद नरेंद्र मोदी गोपी पाण्डेय के जूही स्थित घर गए. इसी दौरान उन्होंने वहां बाल भी कटवाए. इसके बाद फिल्म देखने की बात हुई. पाण्डेय के घर के आसपास ही एक सिनेमाघर था और उन दिनों 'ग़दर' काफी लोकप्रिय थी. नरेंद्र मोदी कुछ कार्यकर्ताओं के साथ हीर पैलेस टॉकीज पहुंचे और फिल्म देखी.
उस समय शायद यह सिर्फ एक सामान्य संगठनात्मक दौरे का हिस्सा था, लेकिन करीब 25 साल बाद वही घटना गोपी पाण्डेय की राजनीतिक यात्रा से जुड़ी एक खास कहानी बन गई है.
तब प्रचारक थे मोदी, अब प्रधानमंत्री हैं
2001 और 2026 के बीच राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. उस वक्त नरेंद्र मोदी संगठन के लिए काम करने वाले प्रचारक थे और गोपी कृष्ण पाण्डेय भाजपा-संघ के जमीनी कार्यकर्ता. आज नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और गोपी पाण्डेय राज्यसभा के लिए भाजपा के उम्मीदवार हैं.
गोपी पाण्डेय की कहानी भाजपा की कैडर आधारित राजनीति को समझने के लिहाज से भी दिलचस्प है. पार्टी में ऐसे कई कार्यकर्ता रहे हैं जो लंबे समय तक संगठन के लिए काम करते रहे, लेकिन चुनावी राजनीति और मीडिया की सुर्खियों में ज्यादा नजर नहीं आए.
राज्यसभा टिकट के पीछे सिर्फ पुराना रिश्ता नहीं
गोपी पाण्डेय की उम्मीदवारी को केवल नरेंद्र मोदी से उनके पुराने परिचय के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी. उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक समीकरण भी इसमें अहम हैं.
भाजपा की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में प्रयागराज से राधाकांत ओझा का नाम भी है. गोपी कृष्ण पाण्डेय और राधाकांत ओझा दोनों ब्राह्मण समाज से आते हैं. इसे उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से देखा जा रहा है.
कानपुर से दो नेताओं को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया जाना भी ध्यान खींचता है. 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र भाजपा के लिए अहम है. ऐसे में दोनों नामों को पार्टी की व्यापक संगठनात्मक और चुनावी रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है.
उन कार्यकर्ताओं के लिए भी संदेश जो सुर्खियों से दूर रहते हैं
गोपी पाण्डेय की उम्मीदवारी का एक दूसरा पहलू भी है. भाजपा में लंबे समय तक संगठन के लिए काम करने वाले ऐसे कार्यकर्ता, जो आमतौर पर कैमरों और सुर्खियों से दूर रहते हैं, उनके लिए यह एक बड़ा संगठनात्मक संदेश माना जा सकता है.
गोपी पाण्डेय की राजनीतिक यात्रा किसी बड़े चुनावी अभियान या लगातार मीडिया मौजूदगी के जरिए नहीं बनी. वह लंबे समय तक संगठन में जिम्मेदारियां निभाते रहे. अब पार्टी ने उन्हें संसद के उच्च सदन के लिए उम्मीदवार बनाया है.
'ग़दर' देखने से राज्यसभा की दहलीज तक
करीब 25 साल पहले नरेंद्र मोदी गोपी पाण्डेय के घर पहुंचे थे. वहीं उन्होंने बाल कटवाए और फिर कार्यकर्ताओं के साथ 'ग़दर' देखने निकल गए. तब नरेंद्र मोदी और गोपी पाण्डेय दोनों ही संगठन के स्तर पर काम कर रहे थे.
आज राजनीतिक तस्वीर बदल चुकी है. नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और गोपी कृष्ण पाण्डेय राज्यसभा के उम्मीदवार. यही वजह है कि राज्यसभा का टिकट मिलने के बाद 2001 की वह पुरानी घटना फिर चर्चा में आ गई है.
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