किसानों के मसीहा कहे जाने वाले चौधरी चरण सिंह ने जब इंदिरा गांधी को भिजवाया जेल, जानें ये दिलचस्प किस्सा

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों से सबसे बड़े नेता रहे चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh) को भारत रत्न देने का ऐलान किया है.

रजत कुमार

09 Feb 2024 (अपडेटेड: 09 Feb 2024, 02:09 PM)

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Uttar Pradesh News : आज भी जब किसानों की बदहाली और उनकी दिक्कतों के सवाल अनसुने किए जाते हैं तो बर्बस ही चौधरी चरण सिंह की कमी जुबां पर आ जाती है.  केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों से सबसे बड़े नेता रहे चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh) को भारत रत्न देने का ऐलान किया है. पीएम मोदी ने खुद एक्स पर पोस्ट कर इस बात का ऐलान किया. राष्ट्रीय लोक दल की तरफ से इसकी मांग काफी लंबे आरसे की जा रही थी. 

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बागपत के विधायक से देश के गृहमंत्री तक

भारत के प्रधानमंत्री के कार्याकल की सूची में चौधरी चरण सिंह का नाम बहुत ही कम समय के लिए दर्ज है, लेकिन राजनीति और देश सेवा में उनका योगदान सुनहरे अक्षरों में अपनी जगह रखता है. वो भारत के इकलौते ऐसे नेता रहे हैं जिन्हें किसान अपना सबसे बड़ा नेता मानते हैं.  बागपत के विधायक से लेकर यूपी के मुख्यमंत्री चुने जाने तक चरण सिंह में इतना आत्मविश्वास आ चुका था कि राष्ट्रीय राजनीति में वो यूपी की सबसे बड़ी सियासी धुरी बन गए. उनके राजनीतिक तेवर ऐसे थे कि आयरन लेडी कहलाने वाली इंदिरा गांधी को भी उन्होंने जेल भिजवाकर ही दम लिया. आइए जानते हैं वो किस्सा.

इमरजेंसी और चौधरी चरण सिंह

बता दें कि 25 जून 1975 को पूरे देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी इमरजेंसी लगा दी थी. विपक्षी नेताओं को जेल भेज दिया था. वहीं इसके बाद 1977 में लोकसभा चुनाव हुए और जनता पार्टी की सरकार बनी. तब देश में पहली ग़ैर कांग्रेसी सरकार बनी थी. प्रधानमंत्री की कुर्सी मोरार जी देसाई ने संभाली. चुनाव में इंदिरा गांधी की हार के बाद उनकी गिरफ्तारी का रास्ता और साफ हो गया. तत्कालीन गृह मंत्री चौधरी चरण सिंह तो जनता पार्टी की सरकार बनते ही इंदिरा गांधी के गिरफ्तारी के पक्ष में थे. इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी के पीछे एक राय यह आपातकाल भी था और दूसरी तरफ आपातकाल के दौरान हुए अत्याचार और नाइंसाफी से नेताओं के बीच इंदिरा गांधी को लेकर नाराजगी थी.
 

गिरफ्तारी का कारण

इमरजेंसी ख़त्म होने के बाद 1977 के लोकसभा चुनाव हुए. इंदिरा गांधी पर ये आरोप लगे कि उन्होंने चुनाव प्रचार में इस्तेमाल की गई जीपों की खरीदारी में भ्रष्टाचार किया था. उस वक्त रायबरेली में प्रचार के मकसद से इंदिरा गांधी के लिए 100 जीपें खरीदी गई थीं. विरोधियों का आरोप था कि जीपें कांग्रेस पार्टी के पैसे से नहीं, बल्कि उद्योगपतियों ने ख़रीदी हैं. इसके अलावा कांग्रेस के चुनाव प्रचार के लिए सरकारी पैसे का इस्तेमाल किया गया है. चौधरी चरण सिंह ने इंदिरा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए शाह कमीशन बनवाया. इंदिरा के ख़िलाफ़ रोज़ गवाहियां और बयान दर्ज होने लगे. आख़िरकार चरण सिंह के आदेश पर इंदिरा गांधी को गिरफ़्तार करके जेल भेजा गया.

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