समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र कन्नौज में PDA कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान खाली कुर्सियों की तस्वीरों ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दीं. सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल पहुंचे थे, लेकिन कार्यक्रम में अपेक्षा के मुताबिक कार्यकर्ता नहीं जुटे. इसके बाद पार्टी ने कन्नौज की पूरी जिला इकाई भंग कर दी. जिले से जुड़े दूसरे संगठनात्मक पदों पर बैठे नेताओं को भी हटाने का फैसला लिया गया.
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कन्नौज समाजवादी पार्टी के लिए खास है. यहां से अखिलेश यादव सांसद हैं और इससे पहले डिंपल यादव भी इस सीट से चुनाव जीत चुकी हैं. पार्टी के गढ़ में प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की कम मौजूदगी को संगठन की कमजोरी के तौर पर देखा जा रहा है. अब सवाल है कि क्या जिला इकाई भंग करने की वजह सिर्फ सम्मेलन में भीड़ नहीं जुटना था या अखिलेश यादव इसके जरिए पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को कोई बड़ा संदेश देना चाहते हैं?
कन्नौज के PDA सम्मेलन में आखिर हुआ क्या था?
कन्नौज में समाजवादी पार्टी के कार्यालय पर PDA कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया था. कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे. सम्मेलन का मकसद कार्यकर्ताओं को एकजुट करना और चुनाव की तैयारियों को आगे बढ़ाना था. कार्यक्रम में टिकट के दावेदारों के पहुंचने की भी चर्चा थी.
सम्मेलन की तस्वीरों में मंच पर नेताओं की मौजूदगी के मुकाबले नीचे खाली कुर्सियां ज्यादा दिखाई दीं. उपलब्ध विवरण के मुताबिक, कार्यक्रम में करीब 100 लोग भी नहीं जुटे थे. स्थिति इसलिए भी चर्चा में आई, क्योंकि कन्नौज को सपा का मजबूत गढ़ माना जाता है.
सम्मेलन में कार्यकर्ताओं की कम मौजूदगी के बाद पार्टी ने पूरी जिला इकाई भंग कर दी. जिले से जुड़े विभिन्न संगठनात्मक पदों पर मौजूद नेताओं को भी हटाया गया. इस फैसले को संगठन में अनुशासन और जवाबदेही का संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
क्या अखिलेश के अलावा दूसरे नेताओं को महत्व नहीं देते कार्यकर्ता?
कन्नौज में सम्मेलन के दौरान कम भीड़ जुटने की एक वजह के तौर पर पार्टी के भीतर नेताओं और कार्यकर्ताओं के व्यवहार पर भी सवाल उठे हैं. राजनीतिक विश्लेषण में बात सामने आई कि कन्नौज के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को अखिलेश यादव तथा उनके परिवार से सीधे जुड़ाव होने का भरोसा है. उन्हें लगता है कि अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र में होने के कारण उनकी बात सीधे पार्टी नेतृत्व तक पहुंच सकती है.
इस सोच के चलते प्रदेश अध्यक्ष या दूसरे वरिष्ठ नेताओं के कार्यक्रम को उतनी अहमियत नहीं मिलने की आशंका जताई गई. हालांकि, कम भीड़ की बताई जा रही वजहों में से एक है. उपलब्ध जानकारी में पार्टी की ओर से सम्मेलन में कम उपस्थिति की कोई विस्तृत आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है.
अखिलेश यादव खुद इस सम्मेलन में शामिल नहीं हुए थे. कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल पहुंचे थे. ऐसे में पार्टी के गढ़ में उनके कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की कम मौजूदगी ने संगठन की सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए.
एटा और कासगंज में भी भंग हो चुकी है जिला इकाई
कन्नौज ऐसा पहला जिला नहीं है, जहां समाजवादी पार्टी ने पूरी जिला इकाई भंग की हो. इससे पहले एटा और कासगंज की जिला इकाइयों पर भी कार्रवाई की गई थी.
बताया गया कि एटा और कासगंज के नेताओं की बैठक पार्टी कार्यालय में बुलाई गई थी. इस दौरान टिकट को लेकर नेताओं के बीच बहस हो गई. योगेंद्र सिंह यादव समेत कई नेता अपने समर्थकों के साथ पहुंचे थे. बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने ही नेताओं के बीच विवाद हुआ.
इसके बाद एटा और कासगंज की जिला इकाइयां भंग कर दी गईं. पार्टी की इस कार्रवाई को अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखा गया. योगेंद्र सिंह यादव को रामगोपाल यादव का करीबी भी माना जाता रहा है. घटना के बाद उन्होंने अपनी सफाई दी और खेद जताने की बात भी सामने आई.
कन्नौज में हुई कार्रवाई को इसी सिलसिले में देखा जा रहा है. अंतर यह है कि एटा और कासगंज में विवाद की स्थिति बनी थी, जबकि कन्नौज में सम्मेलन के दौरान कार्यकर्ताओं की कम मौजूदगी चर्चा का कारण बनी.
गोरखपुर में थप्पड़ कांड के बाद भी हुई थी कार्रवाई
समाजवादी पार्टी ने इससे पहले गोरखपुर की जिला इकाई भी भंग की थी. वहां पार्टी के दो नेताओं के बीच विवाद हुआ था. एक नेता ने दूसरे नेता को थप्पड़ मार दिया था. इस घटना की तस्वीरें और वीडियो चर्चा में आए थे.
बताए गए विवरण के मुताबिक, विवाद में एक ठाकुर नेता और एक निषाद नेता शामिल थे. घटना को लेकर निषाद समुदाय से जुड़े नेताओं ने सवाल उठाए थे. भाजपा ने भी इसे PDA की राजनीति पर निशाना साधने के लिए इस्तेमाल किया था.
घटना सामने आने के बाद अखिलेश यादव ने गोरखपुर की जिला इकाई भंग कर दी थी. इस कार्रवाई को पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा गया.
कन्नौज, एटा-कासगंज और गोरखपुर की घटनाओं में परिस्थितियां अलग-अलग थीं, लेकिन तीनों मामलों में जिला संगठन को भंग करने की कार्रवाई हुई. इससे पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच संदेश गया कि संगठन में अनुशासनहीनता या जिम्मेदारी निभाने में कमी को नेतृत्व गंभीरता से ले रहा है.
खाली कुर्सियों की तस्वीरों पर भाजपा ने क्या कहा?
कन्नौज के PDA सम्मेलन की तस्वीरों को लेकर भाजपा ने भी समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा. कन्नौज से जुड़े भाजपा नेता असीम अरुण ने खाली कुर्सियों को लेकर टिप्पणी की. उन्होंने दावा किया कि सपा के साथ आम लोग नहीं हैं और पार्टी में कुछ लोग अपने हितों के लिए सरकार में वापसी चाहते हैं.
सम्मेलन में कम भीड़ का मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी तक भी पहुंचा. विपक्षी दलों की ओर से इस पर सवाल उठाए जाने लगे. पार्टी के नेताओं से भी पूछा गया कि जिस PDA को सपा अपनी राजनीति का अहम आधार मानती है, उसी के कार्यकर्ता सम्मेलन में इतनी कम उपस्थिति क्यों रही.
अखिलेश यादव का संदेश क्या है?
कन्नौज की जिला इकाई भंग करने के फैसले को केवल भीड़ कम जुटने की कार्रवाई के तौर पर देखना अधूरा होगा. एटा-कासगंज और गोरखपुर में पहले हुई कार्रवाइयों को साथ रखकर देखें तो पार्टी नेतृत्व संगठन में अनुशासन और जिम्मेदारी पर जोर देता दिखाई देता है.
PDA समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा है. पार्टी के लिए जरूरी है कि इस रणनीति को जमीन पर उतारने वाले कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी सक्रिय रहें. प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम में कम उपस्थिति ने संगठन की तैयारी पर सवाल खड़े किए हैं.
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