बागी बलिया की माटी से निकले खाटी समाजवादी नेता और यूपी विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का शुक्रवार देर रात लखनऊ पीजीआई में निधन हो गया. उनके जाने से समाजवादी पार्टी के कुनबे में शोक की लहर दौड़ गई है. ऐसे वक्त में जब यूपी में चुनाव नजदीक हैं और सपा प्रमुख अखिलेश यादव 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे के साथ शोषितों और वंचितों को जोड़ने में जुटे हैं तब रामगोविंद चौधरी जैसा वफादार और कद्दावर चेहरा खो देना पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है.
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उनके निधन के बाद जहां एक तरफ शोक संवेदनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा है. वहीं दूसरी तरफ रामगोविंद चौधरी की उस आखिरी ख्वाहिश की चर्चा हो रही है जो हर सपा समर्थक का सपना है. सोशल मीडिया पर उनके अस्पताल के दिनों का एक इमोशनल कर देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें बिस्तर पर पड़े-पड़े भी वे सिर्फ एक ही रट लगाए हुए थे 'अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाना है.'
अस्पताल के बिस्तर से दहाड़ और वो वायरल वीडियो
निधन के बाद रामगोविंद चौधरी की निष्ठा और जज्बे को बयां करता एक वीडियो सपा कार्यकर्ताओं द्वारा खूब शेयर किया जा रहा है. यह वायरल वीडियो दिसंबर 2025 का है जब तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था और अखिलेश यादव उनसे मिलने पहुंचे थे.
वीडियो में साफ दिख रहा है कि देह भले ही बीमारी से लाचार थी. लेकिन रामगोविंद चौधरी के रोम-रोम में सपा के लिए लड़ने का जोश कायम था. अखिलेश यादव की मौजूदगी में उन्होंने वहां मौजूद डॉक्टरों और नर्सों की तरफ देखते हुए बुलंद आवाज में कहा था 'चुनाव जीतना है, अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाना है... आप लोग भी सुन लो.'
जब डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने और शांत रहने की सलाह दी तो उनका जवाब था कि वे जल्द ठीक होकर फिर से पार्टी के लिए मैदान में उतरेंगे. सपा कार्यकर्ता इस वीडियो को शेयर कर कह रहे हैं कि बागी बलिया के इस शेर की आखिरी ख्वाहिश को पूरा करना ही अब उनका लक्ष्य है.
8 बार विधायक बनने का सफर
9 जुलाई 1946 को बलिया में जन्मे रामगोविंद चौधरी का पूरा जीवन संघर्ष और आंदोलनों से भरा रहा. उन्होंने टाउन डिग्री (टीडी) कॉलेज, बलिया से पोस्ट ग्रेजुएशन और एलएलबी की पढ़ाई की. छात्र जीवन के दौरान ही वे समाजवादी विचारधारा से जुड़ गए थे.1970 के दशक में आपातकाल के दौरान उन्होंने जयप्रकाश नारायण के 'संपूर्ण क्रांति' आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जेल गए. 1977 में वे पहली बार यूपी विधानसभा के सदस्य चुने गए. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और कुल 8 बार विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे. वे यूपी सरकार में कई बार मंत्री रहे और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की अहम जिम्मेदारी निभाई. शिक्षा और पिछड़ों के अधिकारों का मुद्दा वे हमेशा सदन में प्रमुखता से उठाते थे.
जयप्रकाश, चंद्रशेखर और मुलायम से अखिलेश तक
रामगोविंद चौधरी उन विरले नेताओं में शामिल थे जिन्होंने उत्तर प्रदेश में समाजवाद की कई पीढ़ियों को एक साथ देखा और जीया. लोकनायक जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की विचारधारा से राजनीति की शुरुआत करने वाले रामगोविंद चौधरी बाद में 'नेताजी' मुलायम सिंह यादव के सबसे करीबी व भरोसेमंद साथियों में गिने जाने लगे. जब पार्टी की कमान अखिलेश यादव के हाथों में आई तब भी वे पूरी निष्ठा के साथ उनके साथ चट्टान की तरह खड़े रहे. यही वजह है कि उन्हें समाजवाद की पुरानी और नई पीढ़ी के बीच एक मजबूत 'सेतु' माना जाता था.
'जब तक अखिलेश को पीएम-सीएम न बना दूं, मरूंगा नहीं'
सपा कार्यकर्ताओं की यादों में रामगोविंद चौधरी का वह बेबाक अंदाज हमेशा जिंदा रहेगा, जब वे आखिरी बार पार्टी कार्यालय आए थे. उन्होंने अपने मजाकिया अंदाज में कहा था 'जब तक मैं अखिलेश यादव जी को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नहीं बना दूंगा, तब तक मरूंगा नहीं... चाहे जितनी बीमारी क्यों न आ जाए.'
उनके निधन पर अखिलेश यादव समेत पार्टी के तमाम बड़े नेताओं, वरिष्ठ पत्रकारों और समर्थकों ने गहरा दुख जताया है. सोशल मीडिया पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए कार्यकर्ता लिख रहे हैं कि जीवन के अंतिम क्षण तक समाजवाद की साधना करने वाले इस खाटी नेता का जाना पूरी समाजवादी विचारधारा के लिए एक अपूर्णीय क्षति है.
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