Saharanpur News:12 साल पहले गुरुद्वारे को लेकर हुआ था सांप्रदायिक बवाल, आज उसी गुरुद्वारे में मुस्लिम समाज ने की कार सेवा, भाईचारे की बनी ऐतिहासिक मिसाल

Newzo

• 04:55 PM • 07 Jul 2026

Saharanpur Communal Harmony: सहारनपुर में 12 साल पहले जिस गुरुद्वारे को लेकर सांप्रदायिक तनाव और हिंसा हुई थी, आज वहीं भाईचारे की अनूठी तस्वीर देखने को मिली. गुरुद्वारे के लंगर हॉल निर्माण में मुस्लिम समाज ने कर सेवा कर वर्षों पुराने विवाद को पीछे छोड़ सामाजिक सौहार्द, विश्वास और एकता का मजबूत संदेश दिया.

12 साल पहले गुरुद्वारे को लेकर हुआ था सांप्रदायिक बवाल, आज उसी गुरुद्वारे में मुस्लिम समाज ने की कार सेवा, भाईचारे की बनी ऐतिहासिक मिसाल

12 साल पहले गुरुद्वारे को लेकर हुआ था सांप्रदायिक बवाल, आज उसी गुरुद्वारे में मुस्लिम समाज ने की कार सेवा, भाईचारे की बनी ऐतिहासिक मिसाल

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Saharanpur Communal Harmony: वर्ष 2014 में गुरुद्वारा निर्माण को लेकर सांप्रदायिक हिंसा का केंद्र बने सहारनपुर में आज भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली. जिस गुरुद्वारे के निर्माण को लेकर कभी दोनों समुदायों के बीच तनाव और हिंसा हुई थी, उसी गुरुद्वारे के निर्माण कार्य के दौरान लंगर हॉल के लिंटर में मुस्लिम समाज के लोगों ने पहुंचकर कार सेवा की. इस पहल ने करीब 12 वर्ष पुराने विवाद को पूरी तरह समाप्त होने का संदेश दिया.

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भाजपा नेता गुरप्रीत सिंह बग्गा ने बताया कि वर्ष 2014 में हुए विवाद के बाद दोनों समुदायों के बीच लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली. वर्ष 2020 में तत्कालीन जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की पहल पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई और आपसी सहमति से विवाद का समाधान निकाला गया. समझौते के तहत सिख समाज ने मुस्लिम समाज को मस्जिद निर्माण के लिए 200 गज भूमि देने और चार लाख रुपये का चेक देने का निर्णय लिया था.
 
हालांकि मुस्लिम समाज ने बड़ा दिल दिखाते हुए न केवल यह चेक वापस कर दिया बल्कि यह भी वादा किया कि गुरुद्वारे का निर्माण शुरू होने पर वे स्वयं कर सेवा में भाग लेंगे. आज जब गुरुद्वारे के लंगर हॉल का लिंटर डाला गया तो मुस्लिम समाज के लोगों ने अपने वादे के अनुसार पहुंचकर श्रमदान किया. गुरप्रीत सिंह बग्गा ने कहा कि यह केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि विश्वास, भाईचारे और सामाजिक एकता की नई शुरुआत है. उन्होंने मुस्लिम समाज, विशेष रूप से पार्षद मोहर्रम अली पप्पू और उनकी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी ने मिलकर विभिन्न अदालतों में चल रहे मुकदमों को समाप्त कराने और विवाद खत्म कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

पार्षद मोहर्रम अली पप्पू ने कहा कि सिख और मुस्लिम समाज के बीच कभी कोई स्थायी विवाद नहीं रहा. सहारनपुर में जो गलतफहमी पैदा हुई थी, उसे दोनों समुदायों के जिम्मेदार लोगों, प्रशासन और गुरुद्वारा समिति के सहयोग से समाप्त किया गया. उन्होंने कहा कि कर सेवा का जो वादा किया गया था, उसे मुस्लिम समाज ने निभाया है और अब यह विवाद पूरी तरह इतिहास बन चुका है.

दोनों नेताओं ने कहा कि अब इस मुद्दे को राजनीति या विवाद का विषय बनाने के बजाय इसे सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास की मिसाल के रूप में देखा जाना चाहिए. गुरुद्वारे में हुई इस संयुक्त कर सेवा ने यह संदेश दिया कि संवाद, विश्वास और सहयोग से वर्षों पुराने विवाद भी समाप्त किए जा सकते हैं.