अतीक अहमद के गुर्गों को है उसका इंतजार, पुलिस को मिले पोस्टर में दिखा माफिया के लिए प्यार

पंकज श्रीवास्तव

• 01:20 PM • 07 Apr 2023

Prayagraj News: उमेश पाल हत्याकांड (Umesh Pal Murder Case)  के 42 दिन बाद भी मुख्य आरोपी शाइस्ता परवीन और पांचों शूटरों फरार हैं. शूटरों को…

UP Tak
Google CTA

Prayagraj News: उमेश पाल हत्याकांड (Umesh Pal Murder Case)  के 42 दिन बाद भी मुख्य आरोपी शाइस्ता परवीन और पांचों शूटरों फरार हैं. शूटरों को ढूंढने के लिए पुलिस ने नए सिरे से कवायद शुरू की है. अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता की तलाश में पुलिस की 3 टीमें और अतीक के बेटे असद की तलाश में 9 टीमें लगाई गई हैं. वहीं अतीक अहमद और उसके परिवार पर हो रही लगातार कार्रवाई के बाद भी उसके गुर्गों ने पोस्टर के जरिए एक नया पैगाम दिया है.

यह भी पढ़ें...
रात काली के बाद सवेरा होने का है इंतज़ार

बता दें कि पिछले दिनों माफिया अतीक अहमद के टूटे हुए एक ऑफिस में पुलिस ने एक रजिस्टर मिला था. पुलिस को रजिस्टर के अंदर एक पन्ना मिला है . जिसपर अतीक अहमद उर्फ पहलवान की तस्वीर बनी हुई है. उस पर लिखा हुआ है ‘रात कितनी भी काली हो सवेरा जरूर होता है’ इससे साफ है कि अतीक के गुर्गे आज भी काले रात के बाद सवेरे होने का इंतजार कर रहे हैं.

पुलिस ने 5 आरोपियों को रिमांड पर लिया

पुलिस ने 5 आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लिया था. पूछताछ के दौरान अतीक के टूटे हुए दफ्तर से इन अभियुक्तों की निशानदेही पर रजिस्टर, मोबाइल व अली के नाम पर दो आधार कार्ड मिले थे. उसी रजिस्टर के अंदर यह स्लोगन लिखा पेपर भी पुलिस को मिला है. पुलिस ने अब तक कैश, राकेश, निजाय, अरशद कटरा और एकबाल को गिरफ्तार कर चुकी है.

रजिस्टर में मिले कोडवर्ड

इस रजिस्टर पर कई आवश्यक कोडवर्ड का इस्तेमाल किया गया है. इस कोड वर्ड में नाम को आधे-अधूरे अक्षरों में लिखकर गुप्त रखा गया है. यही नहीं इस रजिस्टर पर कई नामों के आगे रकम भी लिखी गई है. माना जा रहा है कि यह रकम उनको देने के बाद इसी रजिस्टर को मेंटेन किया जाता था. इस रजिस्टर के अंतिम पन्ने पर उर्दू भाषा का भी इस्तेमाल किया गया है.

सूत्रो की माने तो इस पोस्टर के ज़रिए माफिया के परिवार ने अपने गुर्गों को इस काली रात के साथ नए सवेरे की बात की गई थी. इससे रजिस्टर के अंदर कई पन्ने फटे भी हुए हैं. अब पुलिस यह भी तलाश रही है कि आखिर फटे हुए पन्ने पर क्या लिखा हुआ था और 24 फरवरी को हुए उमेश पाल शूटआउट कांड से पहले तो कहीं फड़ा तो नहीं गया.