स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्रशासन ने दिया एक और नोटिस, इस बार तो और बड़ी चेतावनी दी गई है!

Swami Avimukteshwaranand Second Notice: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्राधिकरण का कड़ा नोटिस. मौनी अमावस्या पर बैरियर तोड़ने का आरोप, मेले में प्रवेश पर हमेशा के लिए लग सकता है प्रतिबंध. जानें क्या है पूरा विवाद.

Swami Avimukteshwaranand News

संतोष शर्मा

22 Jan 2026 (अपडेटेड: 22 Jan 2026, 10:36 AM)

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Swami Avimukteshwaranand Second Notice: प्रयागराज में चल रहे माघ मेला में प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच पनपा विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. अब प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस दिया है. इसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को न केवल दी गई सुविधाएं निरस्त करने की चेतावनी दी गई है बल्कि भविष्य में उनके मेले में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की भी बड़ी बात भी कही गई है. यह नोटिस मौनी अमावस्या वाले दिन का है जो अब सामने आया है. इस नोटस को 'श्री शंकराचार्य आश्रम शाकंभरी पीठ सहारनपुर' और 'बद्रिका आश्रम हिमालय सेवा शिविर मनकामेश्वर मंदिर' के शिविर संचालकों के नाम पर जारी किया गया है. 

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नोटिस में क्या है आरोप?

नोटिस में प्रशासन ने आरोप लगाया है कि 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के मुख्य स्नान पर्व पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना अनुमति के पांटून पुल नंबर 2 पर लगे बैरियर को तोड़कर संगम अपर मार्ग पर भारी भीड़ के साथ आगे बढ़ रहे थे. प्रशासन का कहना है कि ज्यादा  भीड़ के समय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बग्घी से स्नान करने जाने की जिद कर रहे थे, जिससे मेले में भगदड़ मचने की प्रबल संभावना पैदा हो गई थी. 

कड़ी कार्रवाई की चेतावनी और 24 घंटे का अल्टीमेटम

इस नोटिस में सबसे जरूरी और सख्त बात यह है कि मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है. नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अगर निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलता है, तो उनकी संस्था को मेले में आवंटित जमीन और अन्य सभी सरकारी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएंगी. इतना ही नहीं, भविष्य में हमेशा के लिए उनके माघ मेले में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की भी सख्त बात कही गई है. 

शंकराचार्य पद को लेकर है कानूनी पेंच!

प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अब तक कुल दो नोटिस भेजे हैं. 19 जनवरी को भेजे गए दूसरे नोटिस में उपाध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के तीन साल पुराने एक आदेश का हवाला देते हुए उनसे उनके शंकराचार्य होने का कानूनी सबूत मांगा था. 18 जनवरी के पहले नोटिस में भी उनके नाम के आगे शंकराचार्य लिखे जाने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक का जिक्र किया गया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से 19 जनवरी वाले नोटिस का आठ पन्नों का विस्तृत जवाब पहले ही भेजा जा चुका है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दी ये प्रतिक्रिया

जब यूपी Tak ने शिविर के बाहर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से 18 जनवरी वाले इस नोटिस के संबंध में सवाल किया, तो वे हैरान रह गए. उन्होंने कहा, 'हमें तो पता ही नहीं चला कि एक और नोटिस भी दिया गया है. लेकिन हम इस नोटिस का भी जवाब देंगे. सरकार और प्रशासन के अधिकारी बौखला चुके हैं. वह नोटिस देकर मौनी अमावस्या के मौके पर हुई घटना से लोगों का ध्यान भटकना चाहते हैं.'

नोटिस मिलने की प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल

हैरानी की बात यह है कि 19 जनवरी को जारी किया गया नोटिस उसी दिन आश्रम के गेट पर चस्पा नजर आ गया था, लेकिन उससे एक दिन पहले यानी 18 जनवरी को जारी हुआ यह कड़ा नोटिस तीन दिन बाद 21 जनवरी को सामने आया है. फिलहाल, प्रशासन और स्वामी के बीच का यह टकराव माघ मेले में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. 

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