Jaunpur Murder Case: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के बक्शा थाना क्षेत्र अंतर्गत सद्दोपुर कौली गांव में बुधवार की रात मामूली कहासुनी के बाद दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हो गया. इस विवाद के दौरान लाठी-डंडे और सरिए चलने लगे, जिससे पूरी गांव की गलियां रणभूमि में तब्दील हो गईं. विवाद बढ़ता देख गांव के निवासी और बीजेपी कार्यकर्ता अजय सिंह उर्फ पप्पू बीच-बचाव करने पहुंचे. हालांकि, हमलावरों ने उन पर ही ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इस खूनी झड़प में मृतक के बेटे समेत 4 अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है.
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अंतिम संस्कार से इनकार और एनकाउंटर-बुलडोजर की मांग
पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार को शव परिजनों को सौंपे जाने के बाद इस पूरे मामले ने एक नया मोड़ ले लिया. पीड़ित परिवार ने न्याय की मांग को लेकर शव को घर पर रखकर अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया. मृतक के भाई संजय सिंह और बहू निधि सिंह का कहना है कि जब तक जिला अधिकारी (DM) खुद मौके पर आकर परिवार के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करते, तब तक वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे. परिजनों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि केवल गिरफ्तारी काफी नहीं है, बल्कि मुख्य आरोपियों के खिलाफ सख्त बुलडोजर कार्रवाई की जाए और मुख्य आरोपी का एनकाउंटर किया जाए. हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में मुकदमा दर्ज कर 4 लोगों को हिरासत में ले लिया है, लेकिन मुख्य आरोपी अभी भी फरार हैं.
पुलिस पर वीडियो डिलीट करने का गंभीर आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बक्शा थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. मृतक की बहू निधि सिंह ने आरोप लगाया कि पूरी घटना और मारपीट का वीडियो उनके मोबाइल में मौजूद था, जिसे पुलिसकर्मियों ने देखने के बहाने लिया और बाद में उसे फोन से डिलीट कर दिया. इसके अतिरिक्त, परिवार ने आरोप लगाया कि बक्शा थाने के एक सब-इंस्पेक्टर ने घटना के बाद सांत्वना देने के बजाय संवेदनहीन टिप्पणी करते हुए कहा कि "कुछ तुम लोगों ने ही किया होगा." इन आरोपों के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस के प्रति ग्रामीणों का आक्रोश और ज्यादा बढ़ गया है.
देर रात पहुंचे पूर्व सांसद धनंजय सिंह, अफसरों को लगाया फोन
गांव में बढ़ते तनाव के बीच देर रात पूर्व सांसद धनंजय सिंह पीड़ित परिवार के दरवाजे पर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. जब परिवार ने उनके सामने पुलिस द्वारा मोबाइल से वीडियो डिलीट किए जाने और मीडिया कवरेज रोकने की शिकायत की, तो धनंजय सिंह ने इसे बेहद शर्मनाक और गंभीर बताया. उन्होंने तुरंत मौके से ही पुलिस अधीक्षक (SP) को फोन लगाकर इस विषय में कड़ी आपत्ति जताई. धनंजय सिंह ने कहा कि यह पूरी घटना एक सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के विवाद को लेकर हुई है, इसलिए प्रशासन को इस विवादित जमीन को तुरंत आरक्षित करना चाहिए. उन्होंने आश्वस्त किया कि पीड़ित परिवार के मोबाइल को फॉरेंसिक जांच के लिए भिजवाकर डिलीट किए गए वीडियो को वापस रिकवर कराया जाएगा.
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