मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने दो दोषियों, मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है. लेकिन यह मामला सिर्फ अदालत के सख्त फैसले को लेकर ही नहीं, बल्कि जज साहब के फैसला सुनाने के अनोखे अंदाज के कारण भी सुर्खियों में आ गया है. अदालत में फैसला सुनाने से पहले उन्होंने महाभारत की पंक्तियों का जिक्र किया और न्याय को लेकर अहम बात कही. इसके बाद सबसे ज्यादा ध्यान उस पल ने खींचा, जब जज साहब ने मौत की सजा का फैसला लिखने के बाद अपना पेन डस्टबिन में डाल दिया. करीब 23 साल बाद मेरठ की अदालत से मौत की सजा का ऐसा फैसला आया है, जिसने हर किसी की जिज्ञासा बढ़ा दी है.
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महाभारत की पंक्तियों से हुई शुरुआत
जज अरविंद कुमार मिश्रा ने अपनी कुर्सी पर बैठते ही महाभारत की दो पंक्तियों के साथ इस फैसले की शुरुआत की. उन्होंने अपराध की गंभीरता पर बात करते हुए कहा कि अपराधी को उसके अपराध के हिसाब से दंड देना ही असल न्यायिक धर्म है. उन्होंने बाघ और जंगल का बेहतरीन उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे जंगल में बाघ सुरक्षित है और बाघ से जंगल, वैसे ही कानून इंसानों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है. कानून समाज को सुरक्षित रखने और लोगों के व्यवहार को नियंत्रित करने का काम करता है.
सजा सुनाकर डस्टबिन में फेंका पेन
अदालत में दोनों दोषियों को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद एक ऐसी घटना हुई जिसकी कचहरी परिसर में खूब चर्चा हो रही है. जज साहब ने जिस पेन से मौत की सजा का अंतिम फैसला लिखा था, उसे उन्होंने अपने पास नहीं रखा बल्कि सबके सामने सीधे डस्टबिन में डाल दिया. हालांकि, पेन को डस्टबिन में डालने के पीछे की कोई भी आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है, लेकिन उनके इस एक कदम ने लोगों के मन में कई सवाल जरूर पैदा कर दिए हैं.
कौन हैं जज अरविंद कुमार मिश्रा?
जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा यूपी न्यायिक सेवा के एक बेहद वरिष्ठ अधिकारी हैं. मऊ जिले में जन्मे अरविंद कुमार मिश्रा ने अपने दो दशक से ज्यादा के करियर में कई जिलों में अपनी सेवाएं दी हैं. वह गाजीपुर, सुल्तानपुर और गोरखपुर जैसे जिलों में काम कर चुके हैं और 21 मई 2026 से मेरठ जिला अदालत की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वकीलों के मुताबिक, वह अपने हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के साथ-साथ कई मामलों में आपसी सुलह कराने की बेहतरीन कोशिशों के लिए भी काफी पहचाने जाते हैं.
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