Meerut Amit Kashyap Murder Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ की एक अदालत ने चर्चित अमित कश्यप हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए उसकी कातिल पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई है. साल 2025 में इन दोनों ने मिलकर अमित की बेरहमी से हत्या की थी और पुलिस से बचने के लिए शव के पास एक जिंदा सांप छोड़ दिया था, ताकि इसे सांप के काटने से हुई मौत साबित किया जा सके. अदालत का यह सख्त फैसला सुनते ही जेल में बंद रविता और अमरदीप गहरे सदमे में चले गए. दोनों की रातों की नींद उड़ गई है और उन्होंने खाना-पीना तक छोड़ दिया है. इस फैसले के बाद जेल प्रशासन ने दोनों की सुरक्षा काफी बढ़ा दी है.
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मौत की सजा सुनकर उड़े होश
अदालत से जब फांसी की सजा का ऐलान हुआ, तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े रविता और अमरदीप एकदम सदमे में आ गए. जेल अधीक्षक के मुताबिक, दोनों कैदियों को उम्मीद थी कि उन्हें इस मामले में सिर्फ उम्रकैद की सजा मिलेगी. लेकिन जैसे ही उन्होंने मौत की सजा सुनी, वे अपना मुंह छिपाकर जमीन पर बैठ गए और फूट-फूट कर रोने लगे. दोनों की मानसिक हालत इतनी खराब हो गई थी कि जेल कर्मचारियों को उन्हें समझा-बुझाकर बैरक तक ले जाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
बुखार से बिगड़ी रविता की तबीयत
फांसी की सजा मिलने के बाद जेल में दोनों कैदियों की पहली रात बेहद खौफ और बेचैनी में गुजरी. डर और गहरे सदमे की वजह से दोनों पूरी रात सो नहीं पाए और उन्होंने खाना भी नहीं खाया. रात के समय रविता की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे तेज बुखार आ गया, जिसके बाद जेल के डॉक्टरों की मदद से उसे दवा दी गई. जेल प्रशासन इन दोनों कैदियों की मानसिक स्थिति को देखते हुए लगातार उनकी काउंसलिंग करा रहा है, जिसके बाद ही उन्हें दोबारा खाना खिलाया जाएगा.
जेल में मिले नए कैदी नंबर
देर रात अदालत से सजा का वारंट आने के बाद जेल प्रशासन ने दोनों दोषियों को नए कैदी नंबर दे दिए हैं. अब जेल में रविता की पहचान कैदी नंबर 399 और अमरदीप की पहचान कैदी नंबर 400 के रूप में होगी. दोनों की पुरानी बैरक बदल दी गई है और उन्हें जेल के निर्धारित सफेद कपड़े व साड़ी दे दी गई है. जेल के अंदर अब रविता एनजीओ के लिए कपड़े के थैले (बैग) सिलने का काम करेगी, जबकि अमरदीप को कौन सा काम सौंपा जाएगा, यह आज तय किया जाएगा.
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