'बस अदालत के आदेश का इंतजार...' मुस्कान-साहिल के मृत्यु दंड पर क्या बोले पवन जल्लाद?

यूपी तक

• 12:50 PM • 16 Oct 2026

मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सख्त सजा दी है. अदालत ने सौरभ की हत्या करने वाली उसकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है. इस फैसले के बाद मेरठ के रहने वाले और देश के चर्चित पवन जल्लाद का बयान सामने आया है.

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मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सख्त सजा दी है. अदालत ने सौरभ की हत्या करने वाली उसकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है. इस फैसले के बाद मेरठ के रहने वाले और देश के चर्चित पवन जल्लाद का बयान सामने आया है. पवन जल्लाद ने अदालत के इस फैसले को बिल्कुल सही ठहराया है और कहा है कि ये दोनों अपराधी फांसी के ही पात्र थे. पवन का कहना है कि लोगों को तसल्ली जरूर मिली है, लेकिन असली न्याय तब माना जाएगा जब इन दोनों को फांसी के फंदे पर लटका दिया जाएगा.

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फांसी देने के लिए पवन तैयार

पवन जल्लाद ने कहा कि वह मुस्कान और साहिल को फांसी देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और बस अदालत के आदेश का इंतजार है. उन्होंने फांसी की प्रक्रिया बताते हुए कहा कि जब डेथ वारंट जारी हो जाएगा, तो वह फांसी से दो-तीन दिन पहले जेल पहुंच जाएंगे. वहां जाकर फांसी के फंदे, कैदियों के वजन और फांसी घर का अच्छे से ट्रायल किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मेरठ की जनता और मृतक के परिवार को इस फैसले से बहुत खुशी मिली है.

ऊपरी अदालतों में जाएगा यह मामला

पवन जल्लाद ने यह भी साफ किया कि अभी यह सिर्फ निचली अदालत का फैसला है, इसलिए फांसी होने में समय लगेगा. अब यह मामला हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा और उसके बाद राष्ट्रपति के पास भी दया याचिका जा सकती है. महिला को फांसी देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सुनने में आया है कि महिलाओं को मथुरा जेल में फांसी दी जाती है, लेकिन आखिरी फैसला जेल प्रशासन और अदालत ही तय करेगी कि दोनों को एक साथ फांसी मिलेगी या अलग-अलग.

मामलों को जल्द निपटाने की अपील

पवन जल्लाद के परिवार की यह तीसरी पीढ़ी है जो यह काम कर रही है. इससे पहले उनके दादा कालू राम और पिता भी जल्लाद थे. साल 2020 में पवन ने ही दिल्ली की तिहाड़ जेल में निर्भया कांड के चारों दोषियों को फांसी दी थी. पवन ने अदालत से हाथ जोड़कर यह अपील की है कि ऐसे गंभीर मामलों का निपटारा एक से पांच साल के अंदर हो जाना चाहिए. अगर अपराधियों को जल्द सजा मिलेगी, तो उनके अंदर खौफ पैदा होगा और समाज में ऐसे अपराध कम होंगे.