प्राइवेट पार्ट कटा और खूब हुई ब्लीडिंग... प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत पर शंकराचार्य ने खड़े किए सवाल

यूपी तक

• 12:39 PM • 29 Sep 2026

वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत पर सस्पेंस गहराया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्राइवेट पार्ट कटने की बात आई सामने. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने निष्पक्ष जांच की मांग की.

Vrindavan Premanand Maharaj disciple case

Vrindavan Premanand Maharaj disciple Case

Google CTA

Vrindavan Premanand Maharaj Disciple Case: संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. शुक्रवार सुबह वृंदावन स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम की छत से कथित तौर पर कूदकर आत्महत्या करने का मामला शुरुआत में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर साफ दिख रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृतक के कमरे से मिले एक इलेक्ट्रिक ग्राइंडर ने पूरी घटना को नया मोड़ दे दिया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के प्राइवेट पार्ट कटे होने और बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होने की बात सामने आई है. 

यह भी पढ़ें...

शंकराचार्य ने क्या कहा है?

इस बीच, उत्तराखंड के जोशीमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का भी इस पर बयान आया है. जबलपुर पहुंचने पर घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कहा कि कमरे से ग्राइंडर मिलने और अंग कटने जैसी बातें सामने आने के बाद इसे केवल लापरवाही से गिरना या धक्का देना मान लेना सही नहीं है. इसके पीछे कोई और वजह हो सकती है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि कुछ भी गोल-गोल न रहे और किसी को अटकलें लगाने का मौका न मिले.

इस केस में पुलिस ने क्या-क्या बताया है?

रविवार को पुलिस ने बताया था कि कमरे से मिले इलेक्ट्रिक ग्राइंडर, प्राइवेट पार्ट के कटे होने और अत्यधिक ब्लीडिंग की स्थिति के कारण मामले में गंभीर संदेह पैदा हो रहा है. सीसीटीवी फुटेज में पहली नजर में यह घटना आत्महत्या ही लगती है, लेकिन ब्लीडिंग की असली वजह एक्सपर्ट जांच के बाद ही साफ हो पाएगी. पुलिस का कहना है कि घटना कैसे और क्यों हुई, इसका पूरा खुलासा जांच के बाद ही होगा. इस बीच रविवार को वृंदावन में ही दीपक लोधी का अंतिम संस्कार कर दिया गया. पुलिस फिलहाल इस पूरे मामले की हर पहलू से गहनता से जांच करने में जुटी हुई है.

दूसरी ओर, मृतक दीपक लोधी के बहनोई सोनू पटेल ने इस मामले में बेहद चौंकाने वाला दावा किया था. उन्होंने बताया कि दीपक साल 2024 में प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े थे, जिसके बाद उन्हें 'रसिक दुलारी शरण' नाम से जाना जाने लगा. सोनू पटेल का आरोप है कि गुरु दक्षिणा लेने के बाद से ही दीपक परिवार के संपर्क में नहीं थे और आश्रम के लोग उन्हें परिजनों से मिलने नहीं देते थे. घरवाले उनसे मिलने की उम्मीद में दो-दो घंटे तक इंतजार करके लौट जाते थे. इतना ही नहीं, दीपक ने दो साल पहले ही फोन रखना भी बंद कर दिया था, जिसके चलते लंबे समय से उनकी अपने परिवार से कोई बातचीत नहीं हो पा रही थी.

ये भी पढ़ें: 'उसके साथ गलत हुआ है, 2-4 लोग मिलकर...' रसिक दुलारी के बाबा प्रेम लाल पटेल ने पोते के मौत पर लगाए गंभीर आरोप, की ये मांग!