Mathura Political Row: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मुंबई अध्यक्ष मौलाना सिराज खान के एक बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. मौलाना के बयान पर बृजभूमि के साधु-संतों ने नाराजगी जताते हुए इसे देश की एकता और भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया है.
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बताया जा रहा है कि मौलाना सिराज खान ने एक कार्यक्रम के दौरान प्रस्तावित बिल का विरोध करते हुए कहा कि मुसलमान इसका विरोध करेंगे और जरूरत पड़ी तो जेल जाने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन भारत माता की वंदना नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि मुसलमान केवल अल्लाह के सामने झुकता है और इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा.
मौलाना के इस बयान पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर मामले के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को देश का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत माता की जय और वंदे मातरम् को लेकर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए. फलाहारी महाराज ने कहा कि देश की मिट्टी, संस्कृति और संविधान का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है.
उन्होंने कहा कि देशभक्ति को धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए और भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को देश की एकता और अखंडता का सम्मान करना चाहिए.
इसी मामले में साध्वी डॉ. कृष्ण प्रिया ने भी बयान पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि जिस देश में व्यक्ति रहता है, उसके प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और व्यवस्था के कारण ही प्रत्येक नागरिक अपने धर्म और आस्था का पालन कर पाता है.
बृज क्षेत्र के अन्य संतों ने भी कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां सभी नागरिकों को अपने धर्म और आस्था का पालन करने की स्वतंत्रता है. साथ ही उन्होंने कहा कि राष्ट्र के सम्मान और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना भी जरूरी है.
संतों ने प्रशासन से मांग की कि सार्वजनिक मंचों से दिए जाने वाले ऐसे बयानों की जांच की जाए और यदि कोई बयान कानून का उल्लंघन करता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए. उन्होंने लोगों से अपील की कि धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर संयम बरतें, ताकि समाज में आपसी सौहार्द और शांति बनी रहे.
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