Mathura Civic News: नगर निगम के विकास के दावों के बीच वार्ड नंबर-11 के मुड़ेसी गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी एक बार फिर उजागर हुई है. लगातार हुई बारिश से श्मशान घाट जलमग्न हो गया, जिसके चलते ग्रामीणों को तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा. घटना के बाद स्थानीय लोगों में नगर निगम और प्रशासन के प्रति नाराजगी है.
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जानकारी के अनुसार, भरतपुर रोड स्थित तारसी चौराहा के पास मुड़ेसी गांव निवासी 40 वर्षीय अमर सिंह का बीमारी के चलते बुधवार को निधन हो गया. परिजन जब उनका अंतिम संस्कार करने गांव के श्मशान घाट पहुंचे तो वहां घुटनों तक पानी और कीचड़ भरा मिला. श्मशान घाट में न तो पक्का चबूतरा था और न ही टीनशेड की व्यवस्था. ऐसे में ग्रामीणों ने तिरपाल लगाकर किसी तरह अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की.
स्थानीय निवासी पिंटू सिंह ने बताया कि बरसात के मौसम में हर साल श्मशान घाट की यही स्थिति रहती है. कई बार पार्षद और प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि श्मशान घाट में न पक्का रास्ता है, न पानी निकासी की व्यवस्था और न ही अंतिम संस्कार के लिए शेड उपलब्ध है.
मृतक के परिजनों ने भी व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जीवनभर परेशानियां झेलने के बाद मौत के बाद भी सम्मानजनक अंतिम विदाई नसीब नहीं हो रही है. मजबूरी में बारिश के बीच तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा.
ग्रामीणों का आरोप है कि मुड़ेसी का श्मशान घाट वर्षों से बदहाल स्थिति में है. यहां बाउंड्रीवाल, टीनशेड, पक्का रास्ता और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. हर बरसात में जलभराव की समस्या से लोगों को जूझना पड़ता है.
ग्रामीणों ने नगर निगम और प्रशासन से श्मशान घाट में तत्काल जल निकासी की व्यवस्था, पक्का रास्ता, टीनशेड और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े.
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