31 दिसंबर की रात जहां पूरी दुनिया नए साल 2026 के जश्न में डूबी हुई थी. वहीं बाराबंकी पुलिस लाइन के एक साहब कानून की धज्जियां उड़ाने में मशगूल थे. बाराबंकी में तैनात दरोगा अमित जायसवाल पर नए साल का सुरूर ऐसा चढ़ा कि वह खुद को कानून से ऊपर समझने लगे. शराब के नशे में धुत इस दरोगा ने हजरतगंज में चेकिंग और डायवर्जन के लिए लगाए गए बैरिकेडिंग को तोड़ दिया. वहीं जब पुलिस वाले उन्हें रोकने पहुंचे तो उन्होंने पुलिसकर्मियों को कार से रौंदने की कोशिश की. हद तो तब हो गई जब मौके पर पहुंचे डीसीपी से भी साहब उलझ गए. लेकिन जैसे ही अफसर ने अपनी पहचान बताई दरोगा जी का सारा नशा एक पल में मानों उतर गया.
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क्या है पूरा मामला?
यह घटना 1 जनवरी की रात करीब 12.30 बजे की है. सिविल ड्रेस में कार चला रहा दरोगा अमित जायसवाल जब हजरतगंज चौराहे पर पहुंचा तो ट्रैफिक डायवर्जन के कारण पुलिसकर्मियों ने उसे रोका. रुकने के बजाय आरोपी दरोगा भड़क गया और उसने गाली-गलौज शुरू कर दी. आरोप है कि उसने जानबूझकर कार आगे बढ़ा दी जिससे वहां तैनात दरोगा सीआई आशुतोष त्रिपाठी बाल-बाल बचे. हंगामे के बाद आरोपी दरोगा कार लेकर महानगर की ओर भागने लगा. पुलिस ने जब उसे रोकने की कोशिश की तो उसने कार सीधे ट्रैफिक बैरिकेडिंग पर चढ़ा दी. हालांकि मुस्तैद पुलिस बल ने घेराबंदी कर उसे कुछ ही दूरी पर दबोच लिया.
डीसीपी ने होश लगाए ठिकाने
पकड़े जाने के बाद भी दरोगा का नशा कम नहीं हुआ. मौके पर पहुंचे डीसीपी कमलेश दीक्षित ने जब सवाल पूछे तो अमित जायसवाल उनसे भी उलझ गया और रौब दिखाने लगा. लेकिन जैसे ही डीसीपी ने अपनी आधिकारिक पहचान उजागर की नशे में धुत दरोगा के होश ठिकाने आ गए और उसके तेवर तुरंत ढीले पड़ गए. हजरतगंज के मुख्य चौराहे पर हुए इस तमाशे को सैकड़ों लोग देख रहे थे. पुलिसकर्मियों ने आरोपी दरोगा को काबू में कर पुलिस जीप में बैठाया और हजरतगंज कोतवाली ले गए. बाराबंकी पुलिस प्रशासन को भी इस घटना की जानकारी दे दी गई है जिसके बाद आरोपी दरोगा पर निलंबन और विभागीय जांच की तलवार लटक रही है.
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