उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में अनुशासन बनाए रखने के लिए झांसी पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. 14 और 15 मार्च को आयोजित हुई दरोगा भर्ती परीक्षा में शामिल होने गए 23 सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है. इन सिपाहियों पर आरोप है कि वे परीक्षा देने के बाद तय समय पर ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे और लंबी अवधि तक अनधिकृत रूप से गैरहाजिर रहे.
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अंदरूनी जांच में खुला 'झूठ' का खेल
मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने अंदरूनी जांच के आदेश दिए थे. जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इन सिपाहियों ने छुट्टियां लेने के लिए विभाग से झूठ बोला था. नियमों का उल्लंघन करते हुए उन्होंने परीक्षा से पहले और बाद में अलग-अलग छुट्टियां लीं, लेकिन इसकी सही जानकारी संबंधित विभाग को नहीं दी. पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि परीक्षा देना कोई अपराध नहीं है, लेकिन इसके लिए आधिकारिक अनुमति और तय नियमों का पालन करना अनिवार्य है.
विभाग में सख्ती और अनुशासन का संदेश
इस कार्रवाई के माध्यम से पुलिस महकमे ने अपने कर्मियों को कड़ा संदेश दिया है. पुलिस अधीक्षक के अनुसार, यह कदम अनुशासनहीनता को रोकने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए उठाया गया है. परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि वे निर्धारित समय पर अपनी ड्यूटी जॉइन करें और अवकाश नियमों का सख्ती से पालन करें.
रूटीन जांच और निगरानी तेज
इस घटना के बाद स्थानीय अधिकारियों ने रूटीन जांच और निगरानी बढ़ा दी है. निलंबित सिपाहियों के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को अन्य पुलिसकर्मियों के लिए एक कड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है. विभाग अब ड्यूटी रोस्टर और अवकाश आवेदनों की सूक्ष्मता से जांच कर रहा है ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे.
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