उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित Vervesemi Microelectronics सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की पहली ऐसी कंपनी बन गई है जो दुनिया के विकसित देशों को तकनीक निर्यात कर रही है. 'यूपी Tak' के खास शो 'यूपी की उड़ान' में कंपनी के को-फाउंडर राकेश मलिक (CEO) और प्रताप नारायण सिंह (CTO) ने सेमीकंडक्टर रेवोल्यूशन और अपनी जर्नी के बारे में विस्तार से बताया.
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Vervesemi नाम का अर्थ है 'जीवन' और 'ऊर्जा' को सेमीकंडक्टर (जो मूल रूप से बालू या सैंड से बनता है) में डालना. इसे 'सैंड टू सिलिकॉन' (Sand to Silicon) प्रक्रिया कहा जाता है. सेमीकंडक्टर का महत्व इतना अधिक है कि 2030 तक भारत का इस पर होने वाला खर्च तेल के आयात को भी पार कर सकता है.
मेड इन यूपी चिप का कमाल
कंपनी ने एक ऐसी चिप डिजाइन की है जो एविएशन (हवाई जहाज) और एयरोस्पेस के लिए दुनिया की पहली ऐसी चिप है जो एक साथ 64 सेंसर पैरामीटर्स को कंट्रोल कर सकती है. यह चिप हवाई जहाज के इंजन कंट्रोल यूनिट में इस्तेमाल होती है और लगभग 30,000 डॉलर के विदेशी कंपोनेंट्स को अकेले रिप्लेस कर सकती है. इस छोटी सी चिप में 24 कैरेट गोल्ड (सोना) की प्लेटिंग और गोल्ड वायर्स का इस्तेमाल होता है.
ग्लोबल प्रेजेंस और एक्सपोर्ट
ये कंपनी आज ताइवान, कोरिया, चीन, जापान, यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में अपनी तकनीक एक्सपोर्ट कर रही है. भारत डिजाइन टैलेंट के मामले में ताइवान और चीन से आगे है, हालांकि मैन्युफैक्चरिंग (Fab) में हम अभी शुरुआत कर रहे हैं.
योगी सरकार और केंद्र की नीतियां
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा बनाए गए क्लस्टर्स और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की वजह से नोएडा एक इलेक्ट्रॉनिक हब बन गया है. केंद्र सरकार की डीएलआई स्कीम के तहत सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स को 50% तक वित्तीय सहायता मिल रही है, जिससे इस सेक्टर में 25 से ज्यादा नई कंपनियां उभर रही हैं.
भविष्य का विजन: एक बिलियन डॉलर कंपनी
राकेश मलिक ने बताया कि उनका लक्ष्य अगले 5 साल में वर्ब सेमी को एक बिलियन डॉलर (यूनिकॉर्न) कंपनी बनाना है और भारत के सेमीकंडक्टर आयात को कम से कम 5% तक घटाना है.
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