बुरा फंसे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती! कोर्ट के सख्त आदेश से मचा हड़कंप, अब झूसी थाने में दर्ज होगी FIR

Jyotirmath Shankaracharya Case: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी मुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. नाबालिगों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रयागराज के झूसी थाने को मुकदमा दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं.

यूपी तक

• 06:49 PM • 21 Feb 2026

follow google news

Jyotirmath Shankaracharya Case: धार्मिक जगत से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य मुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण जैसे गंभीर आरोपों में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है. यौन शोषण के गंभीर आरोपों के बीच अदालत ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया है. बता दें कि मामला प्रयागराज के झूसी थाने में दर्ज होगा. कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और नाबालिगों के बयानों को देखते हुए विस्तृत जांच की जरूरत बताई है. इस फैसले के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है.

यह भी पढ़ें...

कोर्ट का आदेश और आरोपों की प्रकृति

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी मुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ एडीजी रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है. उनके साथ उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को भी आरोपी बनाया गया है. यह आदेश याचिकाकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद दिया गया.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि बनारस स्थित आश्रम में नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण और लैंगिक अपराध किए जाते थे. आरोप है कि गुरु सेवा और शिक्षा के नाम पर बच्चों को रात में कमरे में ले जाया जाता था और उनके साथ आपत्तिजनक कृत्य किए जाते थे.

कोर्ट ने क्या कहा

याचिकाकर्ता के अनुसार अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया बच्चों के साथ रेप के आरोप साबित होते नजर आते हैं. कोर्ट ने नाबालिगों के बयान, पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट और पेन ड्राइव में मौजूद सामग्री का अवलोकन किय.अदालत ने माना कि मामले में यौन अपराध के संकेत मिलते हैं और विस्तृत विवेचना आवश्यक है. इसी आधार पर प्रयागराज के झूसी थाने को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया है.

नाबालिगों के बयान और अदालत की प्रक्रिया

बताया गया है कि 23 फरवरी को आरोप लगाने वाले दो नाबालिगों के बयान अदालत में वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किए गए हैं. पुलिस की रिपोर्ट का भी अदालत ने संज्ञान लिया. बयान दर्ज होने और रिपोर्ट पर विचार के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था. अब अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है.

याचिकाकर्ता के गंभीर दावे

याचिकाकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी, श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट और सकुंबरी पीठ से जुड़े हैं. उन्होंने  दावा किया है कि आश्रम की पांचवीं मंजिल पर एसी कमरे में यह घटनाएं होती थीं. उनका आरोप है कि वहां सबूत भी मौजूद हैं, जिन्हें पुलिस की मौजूदगी में बरामद कराया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि आश्रम में रह रहे करीब 20 बच्चों को मुक्त कराने की कोशिश की जाएगी . आशुतोष ब्रह्मचारी ने इसे “न्याय के मंदिर में पहली जीत” बताया है और बनारस स्थित आश्रम तक एक यात्रा निकालने की घोषणा भी की है.

शंकराचार्य का पक्ष

वहीं, शंकराचार्य स्वामी मुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन आरोपों को निराधार बताते हुए लगातार कह रहे हैं कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है.अब अदालत के आदेश के बाद पुलिस विधिक प्रक्रिया के तहत जांच शुरू करेगी। मामले की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

यह भी पढ़ें: UP में युवाओं के लिए सुनहरा मौका! 98000+ पदों पर भर्ती के लिए इन शहरों में लगेगा रोजगार का महाकुंभ, जानें फुल डिटेल्स