हाईटेक सिटी नोएडा में क्या अब बारिश के मौसम में सड़क पर चलना मौत को बुलावा देना है? यह सवाल हम नहीं बल्कि नोएडा की वो तस्वीरें और लगातार होते हादसे चीख चीख कर पूछ रहे हैं. अभी कुछ ही दिनों पहले इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि नोएडा अथॉरिटी और बिजली विभाग की लापरवाही ने एक और होनहार 28 साल के टेस्टिंग इंजीनियर आर्यन को अपनी भेंट चढ़ा लिया. सुबह अपने काम पर निकले आर्यन को क्या पता था कि जिस पानी से बचने के लिए वो सड़क के किनारे से गुजर रहा है, वही रास्ता उसकी जिंदगी का आखिरी रास्ता बन जाएगा. इस खौफनाक हादसे का एक लाइव सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है जिसे देखकर किसी की भी रूह कांप जाए. इस घटना ने एक बार फिर नोएडा अथॉरिटी के दावों और वादों की पोल खोलकर रख दी है.
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रोंगटे खड़े कर देने वाला CCTV फुटेज आया सामने
इस दर्दनाक हादसे का जो सीसीटीवी फुटेज सामने आया है उसने अधिकारियों के दावों पर मुहर लगा दी है. वीडियो में साफ दिख रहा है कि 28 साल का आर्यन सड़क पर भरे पानी से बचता हुआ किनारे-किनारे बेहद सावधानी से आगे बढ़ रहा है. लेकिन तभी अचानक वह एक लोहे के खंभे के पास पहुंचता है उसे करंट का जोरदार झटका लगता है और वह सीधे बराबर में खुले पड़े गहरे नाले में गिर जाता है. नाले में गिरते ही चंद सेकंड में उसकी मौत हो जाती है.
घर का इकलौता चिराग था आर्यन
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद का रहने वाला आर्यन नोएडा के सेक्टर-22 में अपनी मां के साथ रहता था. करीब 5 साल पहले उसके पिता का देहांत हो चुका था जिसके बाद पूरे घर की जिम्मेदारी आर्यन के कंधों पर ही थी. वह सेक्टर-57 की ही एक कंपनी में टेस्टिंग इंजीनियर के पद पर तैनात था और परिवार में अकेले कमाने वाला सदस्य था. इस हादसे ने उसकी बूढ़ी मां को पूरी तरह से तोड़ दिया है. फिलहाल रोते-बिलखते परिजन आर्यन के शव को लेकर अपने पैतृक गांव फर्रुखाबाद रवाना हो गए हैं.
बिजली विभाग और नोएडा अथॉरिटी की दोहरी लापरवाही
इस घटना ने सरकारी विभागों की लापरवाही को एक बार फिर सामने ला दिया है. बता दें कि जिस जगह यह हादसा हुआ, ठीक वहीं पर बिजली का एक लोहे का खंभा लगा है जो बेहद जर्जर स्थिति में है. आशंका है कि बारिश के कारण उस खंभे में करंट उतर आया था जिसने आर्यन को अपनी चपेट में ले लिया. करंट लगने के बाद आर्यन सीधे नाले में जा गिरा क्योंकि वह नाला ऊपर से खुला हुआ था. अगर नाला बंद होता तो शायद आर्यन बच जाता.
नोएडा अथॉरिटी के सीईओ कृष्णा करुणेश ने जब कार्यभार संभाला था तब उन्होंने बकायदा एक सख्त आदेश जारी किया था कि शहर के जितने भी खुले नाले और खतरनाक गड्ढे हैं, उन्हें तुरंत स्लैब डालकर बंद किया जाए. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बड़े हादसे के बाद भी अथॉरिटी के अफसरों ने कोई सबक नहीं लिया. सेक्टर-57 का यह नाला खुला ही छोड़ दिया गया जो आखिरकार एक और मौत की वजह बना.
मौत के बाद जागी अथॉरिटी, आनन-फानन में डाले जा रहे स्लैब
हमेशा की तरह जब एक बेकसूर की जान चली गई और मामला मीडिया में उछला, तब जाकर नोएडा अथॉरिटी की कुंभकर्णी नींद टूटी है. अब अथॉरिटी के कर्मचारी और अधिकारी आनन-फानन में हरकत में आए हैं और सेक्टर-57 व उसके आसपास के तमाम खुले नालों पर सीमेंट के स्लैब डालने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है. लेकिन सवाल वही है कि क्या यह स्लैब आर्यन की मां को उसका बेटा वापस लौटा पाएंगे? और इस लापरवाही के जिम्मेदार अफसरों पर कब कड़ा एक्शन होगा?
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