नीम करौली बाबा की 6 पोतियों ने DM से की शिकायत, 4000 वर्ग फुट वाले पैतृक घर पर क्यों छिड़ी जंग?

यूपी तक

• 12:41 PM • 10 Sep 2026

फिरोजाबाद के अकबरपुर गांव में नीम करौली बाबा के पैतृक घर को लेकर परिवार के बीच विवाद सामने आया है. बाबा की छह पोतियों ने ट्रस्ट पर घर पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत की है, जिसके बाद प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई है.

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देशभर में नीम करौली बाबा की चर्चा एक बार फिर तेज है. उनकी जिंदगी पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ रिलीज होने के बाद बाबा नीम करौली महाराज की विरासत और उनके जीवन से जुड़ी जगहों को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है. इसी बीच उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से उनके पैतृक घर को लेकर विवाद सामने आया है.

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बाबा नीम करौली महाराज के परिवार की छह पोतियों ने आरोप लगाया है कि उनके पैतृक घर पर एक ट्रस्ट ने अवैध कब्जा कर रखा है. इस ट्रस्ट की अध्यक्षता बाबा की बेटी गिरिजा देवी भटेले कर रही हैं. शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है. अब सवाल है कि आखिर बाबा के उस घर को लेकर परिवार में ऐसा विवाद क्यों खड़ा हुआ?

24 अगस्त को शुरू हुआ विवाद

मामला फिरोजाबाद के अकबरपुर गांव का है. गांव बाबा नीम करौली महाराज की जन्मस्थली है. उनका जन्म लक्ष्मी नारायण शर्मा के नाम से हुआ था. यहां मकान नंबर 154 और उससे जुड़े दूसरे निर्माण हैं. उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग इस जगह को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित कर रहा है.

करीब 4,000 वर्ग फुट में बना डुप्लेक्स मकान बाबा की यादों से जुड़ा हुआ है. परिसर में उनका ध्यान कक्ष, भोजन करने की जगह, अतिथियों के कमरे और बेडरूम भी शामिल हैं. फिलहाल इसका प्रबंधन श्री नीम करौली महाराज ट्रस्ट के पास है.

परिवार के सूत्रों के मुताबिक विवाद 24 अगस्त को एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान बढ़ा. आरोप है कि बाबा के दिवंगत बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियों को वहां कमरों में ठहरने की अनुमति नहीं दी गई. इसके बाद मामला परिवार के भीतर से निकलकर जिला प्रशासन तक पहुंच गया.

छह पोतियों ने डीएम से की शिकायत

इसके बाद सुनीता शर्मा, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा, भावना रावत, रितु तिवारी और रिचा रावत ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी. उन्होंने मांग की कि पैतृक घर को ट्रस्ट के नियंत्रण से मुक्त कराया जाए.

शिकायत के बाद जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है. समिति की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) अरविंद कुमार द्विवेदी कर रहे हैं. इसमें टुंडला की एसडीएम दिव्या सिंह और जिला पर्यटन अधिकारी विशाल श्रीवास्तव भी शामिल हैं.

भावना रावत के पति मनोज रावत ने बताया कि जांच समिति के कहने पर संबंधित संपत्ति के दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए गए हैं. अब प्रशासन इन दस्तावेजों और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच करेगा.

परिवार में ही आरोपों पर अलग-अलग राय

हालांकि, बाबा नीम करौली के दूसरे दिवंगत बेटे अनेक सिंह शर्मा के बेटे धनंजय शर्मा ने इन आरोपों से दूरी बना ली है. उनका कहना है कि संपत्ति बाबा नीम करौली की इच्छा के मुताबिक ट्रस्ट को सौंपी गई थी.

धनंजय शर्मा ने परिवार के बीच इस तरह सार्वजनिक विवाद होने पर चिंता जताई और सभी सदस्यों से मामला आपस में बैठकर सुलझाने की अपील की. एक तरफ पोतियां संपत्ति पर ट्रस्ट के नियंत्रण को लेकर सवाल उठा रही हैं तो परिवार का ही एक दूसरा सदस्य इसे बाबा की इच्छा के अनुरूप लिया गया फैसला बता रहा है.

ट्रस्ट ने क्या कहा?

ट्रस्ट के सचिव संजय गुप्ता ने भी अवैध कब्जे के आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के भीतर किसी तरह का विवाद नहीं है. उनका कहना है कि उन्हें धर्म नारायण शर्मा ने नियुक्त किया था और वह अब भी संस्था में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

संजय गुप्ता ने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से उन्हें अभी तक कोई आधिकारिक नोटिस नहीं मिला है. ऐसे में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच पर है कि संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों और दावों की पड़ताल के बाद क्या निष्कर्ष सामने आता है.

फिल्म के बाद फिर चर्चा में आए बाबा

विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ‘हनुमान अंश’ फिल्म की वजह से बाबा नीम करौली महाराज एक बार फिर देशभर में चर्चा में हैं. बाबा के जीवन पर आधारित भक्ति-प्रधान बायोग्राफिकल फिल्म 7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई थी.

कम बजट में बनी इस फिल्म में शोभिनव सत्या मुख्य भूमिका में हैं. फिल्म को शुरुआत में ज्यादा बड़े प्रचार के बिना भी दर्शकों की मजबूत प्रतिक्रिया मिली और वर्ड ऑफ माउथ के जरिए स्लीपर हिट बन गई. रिलीज के एक महीने के भीतर फिल्म ने दुनियाभर में 150 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की.

फिल्म की सफलता के साथ बाबा नीम करौली के जीवन, उनकी जन्मस्थली और उनकी विरासत को लेकर लोगों की दिलचस्पी फिर बढ़ी है. ऐसे में उनके पैतृक घर को लेकर उठा  पारिवारिक विवाद अब सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रह गया है. फिलहाल फैसला प्रशासन की जांच और सामने आने वाले दस्तावेजों पर टिका है.