Chandauli News: पड़ाव-रामनगर मार्ग पर वर्षों से लगने वाले भीषण जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई डॉट पुल चौड़ीकरण परियोजना अब रफ्तार पकड़ चुकी है. लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे इस महत्वाकांक्षी निर्माण कार्य में दो अंडरपास पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, जबकि तीसरे अंडरपास के निर्माण के लिए खुदाई का कार्य शुरू कर दिया गया है.
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रेलवे विभाग की निगरानी में कार्यदायी संस्था टांजेंट इंफ्राटेक द्वारा एक वर्ष पूर्व शुरू की गई इस परियोजना के तहत कुल तीन अंडरपास बनाए जा रहे हैं. इनमें दो अंडरपास पांच-पांच मीटर चौड़े तथा एक अंडरपास 11 मीटर चौड़ा होगा. तीनों अंडरपास की ऊंचाई 5.5 मीटर रखी गई है, जिससे ट्रक, बस और अन्य भारी वाहनों का आवागमन सुगमता से हो सके.
फाउंडेशन थ्रस्ट बेड तैयार करने का कार्य शुरू
वर्तमान में दो अंडरपास का निर्माण पूरा हो चुका है। तीसरे अंडरपास के लिए फाउंडेशन थ्रस्ट बेड तैयार करने हेतु खुदाई का कार्य तेजी से चल रहा है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य पड़ाव की ओर रेल लाइन के उत्तरी छोर से किया जा रहा है. विशेष तकनीक के तहत तैयार किए जा रहे थ्रस्ट बेड पर बॉक्स संरचना को कंप्रेशन तकनीक से स्थापित किया जाएगा. इसके लिए आवश्यक मशीनरी और श्रमिक मौके पर तैनात हैं.
वाराणसी-चंदौली मार्ग के लिए महत्वपूर्ण परियोजना
पड़ाव-रामनगर मार्ग वाराणसी और चंदौली को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है. इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक, मालवाहक वाहन और अन्य यात्री वाहन गुजरते हैं. डॉट पुल की संकरी संरचना के कारण यहां अक्सर लंबा जाम लग जाता है, जिससे आम लोगों के साथ व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं.
बिजली और पेयजल लाइनें बनीं चुनौती
परियोजना की प्रगति के बीच विद्युत पोल और पेयजल आपूर्ति लाइनों का स्थानांतरण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. रेलवे विभाग संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय कर रहा है ताकि इन बाधाओं को शीघ्र दूर कर निर्माण कार्य को और गति दी जा सके. अधिकारियों के अनुसार सभी विभागों के साथ नियमित बैठकें और वार्ताएं जारी हैं.
लोगों को जाम से मिलेगी राहत
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद पड़ाव-रामनगर मार्ग पर लगने वाले लंबे जाम से बड़ी राहत मिलेगी. इससे यातायात व्यवस्था अधिक सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित होगी. लोगों को उम्मीद है कि निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा होने पर यह परियोजना क्षेत्र के यातायात ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव लाएगी.
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