Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आई है. यहाँ आयोजित हो रही यूपीटीईटी (UPTET) यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल होने आ रहे कई अभ्यर्थियों का पेपर सिर्फ इसलिए छूट गया क्योंकि वे रास्ते में लगे एक भारी जाम में फंस गए. यह जाम भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नवनियुक्त प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य के स्वागत में निकाले गए एक विशाल जुलूस के कारण लगा था. लाखों अभ्यर्थी अपने शिक्षक बनने के सपने के साथ परीक्षा केंद्र पर जा रहे थे. लेकिन वीआईपी कल्चर के वजह से उनकी सालों की मेहनत पानी फिर गई है.
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बीजेपी नेता के काफिले से जाम
बीजेपी संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य के समर्थकों में भारी उत्साह था. बरेली-बदायूं रोड पर सैकड़ों गाड़ियों का काफिला निकाला गया, जिसमें कार्यकर्ता नारे लगा रहे थे और सड़कों पर पटाखे छोड़े जा रहे थे. इस वजह से मुख्य सड़क पर करीब 4 घंटे लंबा जाम लग गया. खराब मौसम, तेज बारिश और गड्ढों में जलजमाव होने के कारण सड़क की स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई थी. इस भारी जाम में परीक्षा देने आ रहे कई अभ्यर्थी घंटों फंसे रहे और चाहकर भी समय से अपने परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सके.
यूपी के छात्रों ने लगाई गुहार
जाम के कारण कई छात्र परीक्षा केंद्र पर सिर्फ एक या दो मिनट की देरी से पहुंचे. यूपीटेट परीक्षा में एंट्री का समय दोपहर 1:45 बजे तक तय था. अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्होंने ठीक समय पर एंट्री कर ली थी, लेकिन गेट पर ताला लगा होने के कारण उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया. केंद्र के अधिकारियों ने यह कहकर दरवाजा खोलने से मना कर दिया कि परीक्षा का सिस्टम खुल चुका है. परीक्षा केंद्र के बाहर रोती-बिलखती छात्राओं और अभ्यर्थियों ने पहले 100 नंबर पर फोन किया और फिर जिलाधिकारी (DM) के पास जाकर गुहार लगाई. छात्रों की मांग है कि चूंकि अगले दिनों में भी परीक्षा होनी है, इसलिए उन्हें किसी दूसरी पाली में परीक्षा देने का मौका दिया जाए.
दुर्विजय सिंह शाक्य का सियासी सफर
दुर्विजय सिंह शाक्य का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था. वे लंबे समय तक आरएसएस (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े रहे हैं. पेशे से शिक्षक दुर्विजय सिंह ने एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है. साल 2002 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर 14 दिनों के लिए जेल भी भेजा गया था. वे बीजेपी युवा मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष, पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश सहसंयोजक और मार्च 2023 में ब्रज क्षेत्र के अध्यक्ष बने थे. साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें बदायूं से उम्मीदवार बनाया था, जहां वे सपा के आदित्य यादव से चुनाव हार गए थे.
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