गुसाईगंज सीट पर बीजेपी उम्मीदवार की दावेदारी को लेकर सियासत तेज, अभय सिंह और खब्बू तिवारी के बीच फंसा पेच

यूपी तक

• 01:16 PM • 20 Oct 2026

अयोध्या के गुसाईगंज विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी उम्मीदवार तय करने को लेकर अभय सिंह और खब्बू तिवारी के बीच सियासी मुकाबला तेज हो गया है. जानिए क्या है पूरा जातीय और राजनीतिक गणित.

Google CTA

अयोध्या के गुसाईगंज विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दो प्रमुख नेताओं, अभय सिंह और खब्बू तिवारी, की दावेदारी को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह से गरमाया हुआ है. दोनों ही नेता अपनी-अपनी पक्षधरता और पार्टी के समर्थन के साथ इस सीट से चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं. अभय सिंह दो बार इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं और वर्तमान में भी यहाँ के विधायक हैं. दूसरी ओर, खब्बू तिवारी भी इस क्षेत्र के लोकप्रिय चेहरे हैं और वे खुद भी एक बार विधायक रह चुके हैं, जबकि उनकी पत्नी ने पिछला चुनाव लड़ा था. इस सीट की राजनीति काफी जटिल और विवादित होने के कारण पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच भी गहन विचार-विमर्श जारी है.

यह भी देखें...

दोनों नेताओं का मजबूत आधार और बीजेपी के सामने चुनौती

गुसाईगंज सीट की अहमियत काफी बढ़ गई है क्योंकि दोनों ही नेता अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक आधारों पर बेहद मजबूत माने जाते हैं. अभय सिंह का पिछले चुनावों में बेहतर प्रदर्शन रहा है और उन्हें पार्टी नेतृत्व का समर्थन भी प्राप्त है. वहीं खब्बू तिवारी का परिवार क्षेत्र में काफी प्रभावशाली माना जाता है. इस वजह से बीजेपी के सामने सही उम्मीदवार का चयन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है.

जातीय समीकरण और वोट बैंक का गणित

सियासी परिप्रेक्ष्य से यह मुकाबला केवल दो नेताओं का न होकर अलग-अलग समुदायों के बीच वोट बैंक की लड़ाई भी है. खब्बू तिवारी ब्राह्मण समुदाय से आते हैं, जबकि अभय सिंह ठाकुर समाज के मजबूत नेता हैं. ऐसे में पार्टी के लिए समाज के सभी वर्गों को संतुलित करते हुए उम्मीदवार तय करना बेहद जरूरी हो गया है. इस दौरान स्थानीय कार्यकर्ताओं का मत भी काफी अहम रहेगा, क्योंकि दोनों ही पक्षों के समर्थक चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाएंगे.

अन्य सीटों पर उतारे जाने के विकल्प और संभावित निर्णय

पार्टी स्तर पर अन्य संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है. यदि खब्बू तिवारी को गुसाईगंज सीट से मौका नहीं मिलता है, तो उन्हें या उनकी पत्नी को क्षेत्र की किसी अन्य सीट से मैदान में उतारा जा सकता है. इसके अलावा, अभय सिंह के लिए भी अयोध्या सीट से चुनाव लड़ने की चर्चाएं हैं, जो अंततः पार्टी के निर्णय पर ही निर्भर करेगा. इस पूरे सियासी गणित को ध्यान में रखते हुए बीजेपी नेतृत्व एक महत्वपूर्ण फैसला लेगा, जो आगामी चुनावों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है.