सामने आया नोट गिनने की व्यवस्था का पूरा सच... सीसीटीवी और 50 कर्मचारियों के पहरे में कैसे चोरी हो गया राम मंदिर का चढ़ावा?

Ram Mandir Donation Inquiry: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी को लेकर SIT जांच जारी है. जानिए कैसे 40 दान पेटियों से निकलने वाले नकद को वाराणसी की निजी कंपनी, टीसीएस और एसबीआई के 50 कर्मचारी सीसीटीवी की निगरानी में मैनेज करते थे.

Ram Mandir Donation Inquiry

Ram Mandir Donation Inquiry

संतोष शर्मा

15 Jun 2026 (अपडेटेड: 15 Jun 2026, 06:19 PM)

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सदियों के इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्री राम का भव्य और दिव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ. कपाट खुलते ही देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालुओं का तांता लग गया और करोड़ों हिंदुओं की आस्था के इस केंद्र में रोजाना लाखों रुपये का चढ़ावा आने लगा. लेकिन इसी चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी के आरोपों ने अब तूल पकड़ लिया है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम इस पूरे मामले की कड़ियों को सुलझाने में जुट गई है. इस बीच, राम मंदिर परिसर में चढ़ावे को मैनेज करने और नोटों की गिनती को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली आंतरिक व्यवस्था सामने आई है. सवाल उठ रहा है कि इतनी कड़ी सुरक्षा और निगरानी के बावजूद आखिर यह गड़बड़ी कैसे हुई?

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3 सदस्यीय SIT टीम करेगी दूध का दूध और पानी का पानी

राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) का गठन किया है. इस टीम में बेहद रसूखदार और अनुभवी चेहरों को शामिल किया गया है:

  • विजय विश्वास पंत (मंडलायुक्त, लखनऊ)
  • किरण एस (आईजी, लखनऊ रेंज)
  • नील रतन (वित्त विभाग के अधिकारी)

यह तीन सदस्यीय टीम अब अयोध्या में डेरा डालकर इस पूरे वित्तीय चक्र की जांच करेगी.

चोरी के आरोपों का 'नकद' कनेक्शन... समझिए दान की पूरी व्यवस्था

राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से दान लेने के लिए मुख्य रूप से 3 तरीके अपनाए जाते हैं और पूरे परिसर में लगभग 40 दान पेटियां लगाई गई हैं.

ऑनलाइन दान (QR Code): जो श्रद्धालु क्यूआर कोड या ऑनलाइन माध्यम से दान देते हैं, वह राशि सीधे राम मंदिर ट्रस्ट के बैंक खाते में डिजिटल रूप से जमा होती है. इसलिए इस हिस्से में हेराफेरी या चोरी का कोई सवाल ही नहीं उठता.

नकद चढ़ावा (कैश): एसआईटी की जांच और चोरी के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उनका सीधा संबंध श्रद्धालुओं द्वारा दान पेटियों में चढ़ाए जाने वाले कैश से है. रोजाना आने वाले इस भारी-भरकम कैश को संभालने के लिए एक बड़ी टीम तैनात की गई थी.

ऐसे होती थी नोटों की छंटनी, 50 कर्मचारियों का था पहरा

दान पेटियों से निकलने वाले लाखों रुपये को इकट्ठा करने, नोटों को छांटने, बंडल बनाने और बैंक में जमा करने के लिए लगभग 50 कर्मचारियों की एक विशेष टीम तैनात की गई थी. इनकी पूरी व्यवस्था इस प्रकार थी:

24 कर्मचारी (गड्डी बनाने वाले): नोटों को असेंबल करने, यानी 10, 100, 200 और 500 रुपये के नोटों की अलग-अलग गड्डियां बनाने के लिए 24 कर्मचारी लगाए गए थे. ये सभी कर्मचारी वाराणसी की एक निजी कंपनी के हैं.

12 ट्रस्ट कर्मचारी (सुपरवाइजर): निजी कंपनी के इन कर्मचारियों पर नजर रखने के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के 12 कर्मचारी तैनात थे. नियम के मुताबिक, गड्डी बनाने वाले हर दो बाहरी कर्मचारियों के ऊपर ट्रस्ट का एक आदमी कड़ी निगरानी रखता था.

एसबीआई और टीसीएस (TCS) की निगरानी: इसके अलावा, एसबीआई (SBI) के कर्मचारी और टीसीएस (TCS) कंपनी के 12 से 14 कर्मचारी पूरे सीसीटीवी मैनेजमेंट और सॉफ्टवेयर के जरिए इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते थे.

इंसानी आंखें और सीसीटीवी भी रहे नाकाम?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नोटों की गिनती और बंडल बनाने की प्रक्रिया पर 50 कर्मचारियों की इंसानी आंखें चौबीसों घंटे नजर रख रही थीं, एसबीआई और टीसीएस जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं का सॉफ्टवेयर और सीसीटीवी कैमरों का सख्त पहरा था, तो उसके बाद भी चढ़ावे में चोरी कैसे हो गई? इस सुरक्षा चक्र में चूक कहां हुई, यही एसआईटी के लिए सबसे बड़ी पहेली है.

क्या है वर्तमान कानूनी स्थिति?

राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि चढ़ावे की रकम का नियमित ऑडिट किया जा रहा है. इसी ऑडिट के दौरान कुछ ऐसी वित्तीय गड़बड़ियां और खबरें सामने आईं, जिसके बाद ट्रस्ट ने खुद उत्तर प्रदेश सरकार से एसआईटी (SIT) जांच की मांग की.

फिलहाल, इस पूरे मामले में अभी तक कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं हुई है और न ही किसी व्यक्ति को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार किया गया है. हालांकि, सूत्रों के हवाले से अयोध्या के बाजारों में यह चर्चा बेहद तेज है कि नोट गिनने और बंडल बनाने वाले कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लेकर प्रारंभिक पूछताछ की जा रही है. अब एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही इस मामले में एफआईआर दर्ज होगी और आगे की कानूनी दिशा तय की जाएगी.