UP Mandi Bhav Today: मानसून के बीच मंडियों में मिला-जुला कारोबार, गोंडा में मसूर दाल ₹18,000 तक पहुंची, बारिश के बीच सामान्य रही आवक

Newzo

• 03:34 PM • 04 Jul 2026

 Amethi Mandi Bhav 4 July 2026: मानसून की बारिश के बीच प्रदेश की कृषि मंडियों में कारोबार सामान्य रहा। अधिकांश फसलों के दाम स्थिर बने रहे, जबकि गोंडा मंडी में मसूर दाल के भाव ₹18,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। गुणवत्ता आधारित खरीद और सीमित आवक के बीच किसानों व व्यापारियों ने बाजार में मिश्रित रुख दर्ज किया

मानसून के बीच मंडियों में मिला-जुला कारोबार, गोंडा में मसूर दाल ₹18,000 तक पहुंची, बारिश के बीच सामान्य रही आवक

मानसून के बीच मंडियों में मिला-जुला कारोबार, गोंडा में मसूर दाल ₹18,000 तक पहुंची, बारिश के बीच सामान्य रही आवक

Google CTA

 Amethi Mandi Bhav 4 July 2026: शनिवार को प्रदेश की प्रमुख कृषि मंडियों में अनाज के दामों में लगभग स्थिरता बनी रही. गेहूं, मक्का और सरसों जैसे प्रमुख फसलों के भाव सीमित दायरे में रहे, जबकि दालों और कुछ सब्जियों में हल्की तेजी और उतार-चढ़ाव का रुख देखने को मिला. कुल मिलाकर मंडी बाजार में स्थिरता के साथ मिश्रित कारोबार दर्ज किया गया. इस दौरान मानसून की सक्रियता और कई क्षेत्रों में हल्की बारिश के चलते आवक पर आंशिक असर देखने को मिला. हालांकि बाजार पर इसका बड़ा दबाव नहीं पड़ा और कारोबार सामान्य रूप से चलता रहा.

यह भी पढ़ें...
मंडी फसल / उत्पाद भाव (₹ प्रति क्विंटल) बाजार की स्थिति
अमेठी गेहूं ₹2,400 – ₹2,500 स्थिर
अमेठी मक्का ₹1,800 – ₹2,000 स्थिर
अमेठी सरसों ₹5,000 – ₹5,400 हल्की तेजी
अमेठी आलू ₹1,200 – ₹1,400 सामान्य
गोंडा गेहूं ₹2,400 – ₹2,500 स्थिर
गोंडा मसूर दाल ₹9,000 – ₹18,000 गुणवत्ता के अनुसार बड़ा अंतर
गोंडा अन्य दलहन ₹8,000 – ₹9,500 हल्की तेजी / चयनात्मक खरीद

किसानों का कहना है कि मंडियों में अनाज के भाव लगभग स्थिर रहने से उन्हें अपनी उपज बेचने में कोई बड़ी परेशानी नहीं हुई, लेकिन कुछ फसलों में तेजी न आने से अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका. उनका मानना है कि यदि मांग में सुधार होता है तो गेहूं और दलहन के दाम और बेहतर स्तर पर पहुंच सकते हैं.

वहीं व्यापारियों के अनुसार, मौजूदा बाजार में स्थिरता का माहौल बना हुआ है और मानसून की सक्रियता के कारण आवक में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. उनका कहना है कि दालों में गुणवत्ता के आधार पर भारी अंतर बना हुआ है, जिससे खरीद-फरोख्त में चयनात्मक रुख अपनाना पड़ रहा है.