उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से खाकी का एक बेहद संवेदनशील और मानवीय चेहरा सामने आया है. फतेहाबाद के गांव नरी में पिछले चार साल से एक जर्जर और कच्ची झोपड़ी में बेहद गरीबी और अकेलेपन में जीवन गुजार रही बुजुर्ग विधवा भूरी देवी तक जब पुलिस मदद लेकर पहुंची तो उनकी आंखें नम हो गईं. 'मिशन शक्ति' अभियान के तहत ACP इमरान अहमद अपनी टीम के साथ खुद बुजुर्ग महिला की सुध लेने पहुंचे और उन्हें राशन, फल व अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया.
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झोपड़ी में अकेली गुजार रही हैं जिंदगी
गांव नरी की एक एकांत जगह पर बनी कच्ची झोपड़ी ही पिछले चार सालों से भूरी देवी का एकमात्र आशियाना है. मौसम चाहे कड़ाके की धूप का हो, हड्डियों को जमाने वाली ठंड का या मूसलाधार बारिश का उनका जीवन तमाम बुनियादी सुख-सुविधाओं से वंचित रहा है. स्थिति यह थी कि रसोई में खाने का एक तिनका तक नहीं बचा था और भूख मिटाने के लिए उन्हें बासी रोटियों का सहारा लेना पड़ रहा था.
पुलिस की गाड़ी देख सहम गई थीं बुजुर्ग महिला
जब एसीपी इमरान अहमद पुलिस बल के साथ उनकी झोपड़ी पर पहुंचे, तो पुलिस को देखकर भूरी देवी डर गईं. उन्हें लगा कि शायद उनकी यह कच्ची झोपड़ी भी उजाड़ने के लिए पुलिस आई है. उन्होंने बताया कि सुबह उन्होंने केवल बासी रोटी खाई थी और उनके पास ताजी रोटी बनाने का भी कोई साधन नहीं था.
एसीपी ने बढ़ाया मदद का हाथ, मिला राशन और सामान
बुजुर्ग महिला की दयनीय स्थिति और पीड़ा को समझते हुए एसीपी फतेहाबाद इमरान अहमद ने तुरंत प्रशासनिक और मानवीय सहायता पहुंचाई. भूरी देवी को आटा, दाल, चावल, तेल, ताजी सब्जियां और ढेर सारे फल दिए गए ताकि उन्हें खाने-पीने की किल्लत न हो. महिला पुलिसकर्मियों द्वारा उन्हें साड़ी और अन्य जरूरी घरेलू सामान भेंट किया गया.
पुलिस अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें कोई परेशान नहीं करेगा. साथ ही उनके रहने के लिए स्थायी व्यवस्था या आवास (सरकारी योजना के तहत) बनवाने को लेकर प्रधान व स्थानीय प्रशासन से बात करने का आश्वासन दिया गया.
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