UP News: उत्तर प्रदेश के चार प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में लागू विशेष आरक्षण व्यवस्था को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने रद्द कर दिया है. बता दें कि यह निर्णय कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन और सहारनपुर के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए लागू किए गए आरक्षण नियमों पर दिया गया है. कोर्ट ने इस आरक्षण व्यवस्था को असंवैधानिक ठहराया और राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया. क्याहै पूरा मामला आगे खबर में जानिए.
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क्यों रद्द किया गया आरक्षण आदेश?
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जस्टिस पंकज भाटिया की सिंगल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. कोर्ट ने विशेष ग्रांट के तहत चारों मेडिकल कॉलेजों में 79% से अधिक आरक्षण को रद्द किया. इस आरक्षण व्यवस्था के तहत, इन कॉलेजों में प्रवेश के लिए 79% सीटें विभिन्न जातियों के लिए आरक्षित की गई थीं, जो कि केंद्र सरकार द्वारा दी गई 50% आरक्षण की सीमा से कहीं अधिक था.
आरक्षण व्यवस्था का विवरण
बता दें कि कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन और सहारनपुर के मेडिकल कॉलेजों में कुल 340 सीटें थीं जिनमें से अनुसूचित जाति (SC) के लिए 248 सीटें, अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 20 सीटें, आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 44 सीटें, और सामान्य (General) वर्ग के लिए 28 सीटें आरक्षित की गई थीं. इसके अलावा, प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में कुल 85 सीटों में से अनुसूचित जाति (SC) के लिए 62 सीटें, अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 5 सीटें, OBC के लिए 11 सीटें, और सामान्य (General) वर्ग के लिए 7 सीटें आरक्षित की गई थीं.
मेडिकल कॉलेजों का इतिहास
उत्तर प्रदेश सरकार ने 2010 में कन्नौज मेडिकल कॉलेज की स्थापना की थी. इसके बाद 2011 में अंबेडकर नगर मेडिकल कॉलेज, 2013 में जालौन मेडिकल कॉलेज और 2015 में सहारनपुर मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई. इन सभी कॉलेजों में प्रवेश के लिए विशेष आरक्षण व्यवस्था लागू की गई थी, जिसके तहत इन कॉलेजों में 50% से अधिक आरक्षण दिया गया था जो कि सरकारी नियमों से मेल नहीं खाता था.
हाईकोर्ट का आदेश और अगला कदम
हाईकोर्ट के आदेश के बाद, अब काउंसलिंग बोर्ड की बैठक कल बुलाई जाएगी. इस बैठक में यह निर्णय लिया जाएगा कि इन चार मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए क्या कार्रवाई की जाए. मेडिकल एजुकेशन विभाग भी इस मामले में विधिक राय लेने की प्रक्रिया में है, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
राज्य सरकार का प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में जल्द ही अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्णय लिया है. राज्य सरकार का कहना है कि वह हाईकोर्ट के आदेश का पालन करेगी, लेकिन मामले के कानूनी पहलू पर गौर कर रही है.
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