यूपी पुलिस सिपाही भर्ती को लेकर मचा बवाल! भाजपा विधायक शलभ मणि ने जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए की बड़ी मांग

यूपी पुलिस भर्ती 2026 के तहत 32,679 पदों पर नोटिफिकेशन जारी होते ही जहां सरकार इसे नए साल का तोहफा बता रही है, वहीं सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी आयु सीमा को लेकर विरोध कर रहे हैं. सोशल मीडिया से लेकर राजनीति तक ऐज रिलैक्सेशन की मांग तेज हो गई है, विपक्ष और सत्तापक्ष के नेता भी अब इस मुद्दे पर सरकार से फैसला लेने की अपील कर रहे हैं.

निष्ठा ब्रत

• 12:49 PM • 03 Jan 2026

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UP Police Recruitment 2026: नए साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस भर्ती की बड़ी घोषणा कर लाखों युवाओं को उम्मीद दी है. लेकिन यही भर्ती अब विवाद और विरोध का कारण भी बनती दिख रही है. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2026 के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती के तहत कुल 32679 पदों पर सिपाही और समकक्ष पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं. बता दें कि इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 से शुरू हो चुकी है और 30 जनवरी 2026 तक चलेगी. 

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यह भर्ती पुरुष और महिला दोनों अभ्यर्थियों के लिए है और आवेदन वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) के जरिए किए जाएंगे. हालांकि इस भर्ती के ऐलान के साथ ही सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने ऐज लिमिट को लेकर विरोध शुरू कर दिया है. सोशल मीडिया से लेकर चौराहों तक छात्र सरकार से तीन साल की ऐज लिमिट में छूट की मांग कर रहे हैं.

32679 पदों पर होगी भर्ती

इस बार यूपी पुलिस की भर्ती सिर्फ सिविल पुलिस तक सीमित नहीं रखी गई है. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अनसार कुल 32679 पदों पर होने वाली इस भर्ती में अलग-अलग कैटेगरी के पद शामिल किए गए हैं. इनमें कॉन्स्टेबल (सिविल पुलिस), कॉन्स्टेबल पीएसी/आर्म्ड पुलिस, कॉन्स्टेबल स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स, महिला बटालियन के लिए महिला कॉन्स्टेबल, जेल वार्डर (पुरुष) समेत अन्य समकक्ष पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. लंबे समय बाद आई इस बड़ी भर्ती को सरकार युवाओं के लिए नए साल का तोहफा बता  रही है लेकिन दूसरी ओर बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी भी हैं जिनके लिए ऐज लिमिट की वजह से यह मौका हाथ से निकलता हुआ नजर आ रहा है.

सामान्य वर्ग के छात्रों ने की ऐज लिमिट बढ़ाने की मांग

विज्ञापन के मुताबिक, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए ऐज लिमिट18 से 22 साल तय की गई है, जबकि आरक्षित वर्ग के लिए 18 से 27 साल की ऐज लिमिट मान्य है. सामान्य वर्ग के छात्रों का कहना है कि पुलिस भर्तियों में लगातार देरी की वजह से कई योग्य उम्मीदवार ओवरएज हो चुके हैं. उनका तर्क है कि जब सालों तक भर्ती नहीं आई तो इसका खामियाजा युवाओं को क्यों भुगतना पड़े. इसी को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध तेज है और सरकार से तीन साल की ऐज में छूट देने की मांग की जा रही है.

छात्रों  का कहना है कि वे सालों से भर्ती का इंतजार कर रहे थे लेकिन जब भर्ती आई तो आयु सीमा आड़े आ गई.छात्रों ने कहा कि अगर समय पर भर्तियां होतीं तो वे आज ओवरएज नहीं होते. छात्रों ने सरकार से मानवीय आधार पर फैसला लेने की अपील की और कहा कि तीन साल की आयु छूट देने से हजारों युवाओं को एक और मौका मिल सकता है.

बीजेपी के सहयोगी दल ने सीएम को लिखा पत्र

इस मुद्दे पर अब बीजेपी के सहयोगी निषाद पार्टी के विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी ने अभ्यर्थियों की मांग का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि “पुलिस की पीएसी और जेल वार्डर की भर्ती काफी लंबे समय से लंबित थी. ये भर्तियां करीब 7 सालों के बाद आई हैं. सामान्य वर्ग के छात्र भर्ती का इंतजार करते-करते ओवरएज हो चुके हैं. मुख्यमंत्री जी ने भी जनता दर्शन में युवाओं को आश्वासन दिया था. मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सामान्य वर्ग के छात्रों के हित में निर्णय लेने की मांग की है.”

विपक्ष ने किया सरकार पर हमला

इस भर्ती को लेकर विपक्ष भी सरकार पर हमलावर है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर सरकार को घेरा. उन्होंने लिखा कि “भाजपा सरकार की खामियों के कारण अनियमित हुई पुलिस भर्ती और उसकी वजह से ओवरएज हो गये अभ्यर्थियों को उम्र की छूट देकर उप्र सरकार नव वर्ष का तोहफा दे. भाजपा सरकार की लचर और दोषपूर्ण भर्ती प्रक्रिया का खामियाजा बेरोजगार युवा क्यों भुगतें. हम पुलिस भर्ती के हर अभ्यर्थी की मांग के साथ हैं. युवाओं का भविष्य ही देश का भविष्य है.”

वहीं सपा के प्रवक्ता दीपक रंजन ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भर्ती में देरी के लिए सरकार जिम्मेदार है और अब युवाओं को राहत देना उसकी जिम्मेदारी बनती है.

बीजेपी के भीतर भी उठी मांग

ऐज लिमिट में छूट की मांग अब बीजेपी के भीतर से भी उठने लगी है. देवरिया से बीजेपी विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को तीन साल की ऐज में छूट देने की मांग की है. उन्होंने पत्र में मानवीय आधार पर निर्णय लेने की अपील की है. हालांकि, शलभ मणि त्रिपाठी की मांग केवल सामान्य वर्ग के लिए है जबकि अखिलेश यादव सभी वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए आयु छूट की बात कर रहे हैं.

भर्ती बोर्ड में सवालों से बचते दिखे अधिकारी

जब इस पूरे विवाद पर आधिकारिक पक्ष जानने के लिए आज तक की टीम यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड पहुंची तो वहां बोर्ड के अध्यक्ष और डीजी एस.बी. शिरोडकर ने इस भर्ती को लेकर कोई स्पष्ट जवाब देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि “अगर हमें पता होता कि आप इस बारे में सवाल करेंगे तो हम आपसे बात नहीं करते. किसी और मामले पर बात करनी हो जैसे क्लाइमेट तो कर सकता हूं, लेकिन इस भर्ती पर नहीं.”

क्या सरकार निकाल पाएगी कोई रास्ता?

भले ही भर्ती में आरक्षण नियमावली का पालन किया गया हो लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आयु सीमा में बदलाव करना सरकार के लिए बड़ा प्रशासनिक और कानूनी चैलेंज हो सकता है. हालांकि, पहले भी कुछ भर्तियों में आयु सीमा को लेकर बदलाव किए जा चुके हैं.

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