Ravi Kishan Gaon: भोजपुरी सिनेमा के मेगास्टार और गोरखपुर से भाजपा सांसद रवि किशन अक्सर अपनी बेबाकी और विकास कार्यों को लेकर चर्चा में रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रवि किशन का पैतृक गांव गोरखपुर में नहीं जौनपुर जिले के किराकत विधानसभा क्षेत्र में स्थित है? यूपी तक की टीम जौनपुर-वाराणसी बॉर्डर से करीब 50 किलोमीटर दूर बरई बिसोई गांव पहुंची यह जानने के लिए कि रवि किशन के गांव में विकास की जमीनी हकीकत क्या है.
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शानदार गेट और बंद मकान: गांव की पहली झलक
गांव की शुरुआत में ही एक भव्य प्रवेश द्वार बना है जो इस गांव की पहचान को खास बनाता है. गांव के अंदर घुसते ही रवि किशन का पुश्तैनी मकान नजर आता है.हालांकि वहां ताला लटका मिला. स्थानीय लोगों का कहना है कि व्यस्तता के कारण रवि किशन कभी-कभार ही यहां आते हैं. लेकिन गांव से उनका जुड़ाव बना रहता है. गांव के विकास पर बातचीत करते हुए स्थानीय निवासी अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में यहां काफी बदलाव आया है. गांव में सोलर लाइटें इस कदर लगाई गई हैं कि रात में भी शहर जैसा अहसास होता है. सड़कें बन चुकी हैं और गलियों में खरंजा बिछाया जा रहा है.
ग्रामीणों का मानना है कि प्रधानी से लेकर सांसद स्तर तक के कामों से करीब 90 फीसदी लोग संतुष्ट हैं. वर्तमान प्रधान विराट सिंह के काम की भी ग्रामीण सराहना करते दिखे.गांव के पास ही एक बड़ा होम्योपैथी अस्पताल और 60 से 80 बेड का सरकारी अस्पताल बन रहा है जिससे इमरजेंसी की स्थिति में ग्रामीणों को शहर नहीं भागना पड़ेगा.
रवि किशन की हालिया फिल्म लापता लेडीज की चर्चा उनके गांव की गलियों में भी है. ग्रामीणों ने उनके इंस्पेक्टर मनोहर सिंह वाले किरदार और बनारसी पान खाने के अंदाज की जमकर तारीफ की. बुजुर्गों का कहना है कि रवि किशन जब गांव आते हैं तो बिना किसी तामझाम के सबसे वैसे ही मिलते हैं जैसे बचपन में मिला करते थे.
'पहले बाइक नहीं जाती थी, अब गाड़ियां दौड़ती हैं'
80 वर्षीय मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि 10-15 साल पहले गांव के हालात ऐसे थे कि बाइक ले जाना भी मुश्किल था. आज गांव और शहर का अंतर खत्म हो गया है. उन्होंने बताया कि गांव में मंदिर का निर्माण और सोलर लाइटें लगवाने में रवि किशन का बड़ा योगदान रहा है. हालांकि वर्तमान सांसद प्रिया सरोज के कार्यों को लेकर कुछ ग्रामीणों ने कहा कि अभी वहां से बड़े बदलाव का इंतजार है.
क्या कमी रह गई?
गांव के लोग अब इसे एक 'स्मार्ट विलेज' के रूप में देखना चाहते हैं. हालांकि मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली, सड़क और पानी पहुंच चुकी हैं. लेकिन युवाओं के लिए रोजगार और गांव के भीतर ही उच्च शिक्षा के और बेहतर संसाधनों की उम्मीद ग्रामीण लगाए बैठे हैं.
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