स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के MP वाले आश्रम के बेडरूम का वीडियो आया सामने, लक्जरी लाइफ वाले आरोपों की क्या है सच्चाई?

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर स्थित शंकराचार्य आश्रम की पड़ताल में क्या सामने आया. एमपी Tak की ग्राउंड रिपोर्ट में देखें वह कक्ष जहां ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद और अब अविमुक्तेश्वरानंद जी रहते हैं. सेवादारों और संस्कृत पाठशाला के छात्रों ने स्विमिंग पूल और लक्जरी के आरोपों को बताया झूठ.

यूपी तक

• 07:35 PM • 26 Feb 2026

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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे आरोपों के बाद अब उनके अलग-अलग आश्रमों की पड़ताल शुरू हो गई. हाल ही में वाराणसी के आश्रम के बाद अब और 'यूपी TAKएमपी तक' की टीम मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर स्थित उनके आश्रम पहुंची. आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा लगाए गए 'ऐशो-आराम और स्विमिंग पूल' जैसे दावों के बीच टीम ने आश्रम के उस कक्ष और वातावरण का जायजा लिया जहां शंकराचार्य निवास करते हैं.

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ब्रह्मलीन शंकराचार्य की विरासत वाला रूम

नरसिंहपुर का यह आश्रम दो मंजिला है.इसकी दूसरी मंजिल पर एक साधारण सा रूम बना हुआ है जहां वर्तमान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विश्राम करते हैं. खास बात यह है कि इसी कक्ष में ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी भी निवास किया करते थे.आश्रम का वातावरण आज भी अत्यंत साधारण और पारंपरिक है.

स्विमिंग पूल और लक्जरी के दावों पर सफाई

आश्रम में 'स्विमिंग पूल' और 'लक्जरी जीवनशैली' के आरोपों पर वहां के सेवादारों ने कड़ा रुख अपनाया है. सेवादारों का कहना है कि महाराज जी किसी भी प्रकार के स्विमिंग पूल का उपयोग नहीं करते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिसे स्विमिंग पूल कहा जा रहा है वह पूर्व में बड़े महाराज जी (स्वरूपानंद जी) की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए था. लेकिन वर्तमान में महाराज जी वहां स्नान नहीं करते हैं.

'पैर छूने तक की इजाजत नहीं'

आश्रम में स्थित संस्कृत पाठशाला के छात्रों ने भी इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है.11वीं और 12वीं के छात्रों ने बताया कि महाराज जी का अनुशासन इतना कड़ा है कि वे किसी को उन्हें स्पर्श (टच) तक नहीं करने देते.एक छात्र ने भावुक होकर कहा, 'हमें यहां रहते 4 साल हो गए, लेकिन हम आज तक महाराज जी के पैर तक नहीं छू पाए हैं.'

षड्यंत्र का आरोप

आश्रम के लोगों का मानना है कि आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं और यह शंकराचार्य जी की छवि धूमिल करने का एक सुनियोजित प्रयास है.उनके अनुसार, महाराज जी का स्वभाव अत्यंत सरल है और वे नियमित रूप से विद्यालय के बच्चों और श्रद्धालुओं से मिलते हैं.