गाजीपुर में कमलेश बिंद एनकाउंटर के बाद बढ़ा तनाव, योगी सरकार पर सपा ने लगा दिए ये गंभीर आरोप

Kamlesh Bind Encounter: गाजीपुर में एक लाख के इनामी कमलेश बिंद के एनकाउंटर के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. समाजवादी पार्टी और मृतक परिवार ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए जांच की मांग उठाई है.

यूपी तक

• 10:01 AM • 06 Jun 2026

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Kamlesh Bind Encounter: गाजीपुर में एक लाख रुपये के इनामी बदमाश कमलेश बिंद के एनकाउंटर ने पूर्वांचल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है. दो दिन पहले हुए इस एनकाउंटर के बाद से इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. कमलेश बिंद का नाम चर्चित विनीत राय हत्याकांड में आरोपितों की सूची में शामिल था, जिसमें शंकर पांडे समेत अन्य लोगों के नाम भी सामने आए थे. पुलिस कार्रवाई के बाद जहां प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था की बड़ी सफलता बता रहा है, वहीं समाजवादी पार्टी इस पूरे मामले को लेकर योगी सरकार पर हमलावर हो गई है. पार्टी लगातार इस एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है, जबकि मृतक का परिवार इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए न्याय की गुहार लगा रहा है. एनकाउंटर के बाद इलाके में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया.

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इस घटना ने केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों को भी प्रभावित किया है. कमलेश बिंद के परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें न्याय नहीं मिला और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. वहीं, इस घटना के बाद मल्लाह और निषाद समाज में भी नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है, जिसे विपक्ष राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुट गया है. समाजवादी पार्टी इस पूरे प्रकरण को भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेरने के लिए बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में पेश कर रही है. पार्टी का मानना है कि इस घटना का असर पूर्वांचल की राजनीतिक स्थिति और सामाजिक समीकरणों पर पड़ सकता है, जिससे क्षेत्र में भाजपा के प्रभाव पर असर देखने को मिल सकता है.

विवाद उस समय और गहरा गया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन के दौरान दिए गए एक पुराने भाषण में “टोटी” शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले में सरकार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि निर्दोष लोगों की मौतों को नजरअंदाज किया जा रहा है. वहीं, सांसद डिंपल यादव ने भी एनकाउंटर को जरूरी कार्रवाई मानने से इनकार करते हुए कहा कि आरोपित को जिंदा पकड़कर कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए थी. इस पूरे घटनाक्रम के बीच गाजियाबाद के एक अन्य एनकाउंटर मामले का जिक्र भी राजनीतिक चर्चाओं में हो रहा है, जहां विपक्ष ने कुछ नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं. कुल मिलाकर कमलेश बिंद एनकाउंटर अब केवल आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि पूर्वांचल की राजनीति, सामाजिक असंतोष और सरकार-विपक्ष के बीच तीखे टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है.