रागिनी सोनकर उत्तर प्रदेश की मछलीशहर सीट से विधायक हैं और 2022 में पहली बार चुनी गईं. वे समाजवादी पार्टी की मजबूत और प्रखर वक्ता हैं, जो महिला आरक्षण बिल सहित संवेदनशील मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाती हैं. उनका राजनीतिक सफर जौनपुर से शुरू होकर बनारस तक फैला है, जहां उनके पिता भी राजनीति से जुड़े थे. डॉक्टर की डिग्री लेकर भी उन्होंने राजनीति को चुना ताकि स्वास्थ्य और सामाजिक सुधारों में भूमिका निभा सकें. उनका वक्तृत्व समाज में बहस का विषय रहता है और वे अपनी पार्टी में एक महत्वपूर्ण नेतृत्व भूमिका निभा रही हैं.
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रागनी सोनकर ने विधानसभा में कठोर टिप्पणियाँ कीं और विपक्ष के खिलाफ गहरी आलोचना की. उन्होंने महिला सुरक्षा, आरक्षण और सामाजिक अन्याय के मुद्दे उठाए. उनके भाषणों से यह स्पष्ट होता है कि वे नारी सशक्तिकरण की प्रतिमूर्ति हैं और समाज में महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं. उन्होंने कई घटनाओं जैसे हाथरस, मथुरा, मेरठ और अन्य स्थानों पर महिलाओं के साथ हुए अन्याय को उजागर किया.
उनका राजनीतिक संघर्ष आसान नहीं रहा है. विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के मजबूत नेता खुराया को मात दी. उनके पिता कैलाश सोनकर पहले अन्य पार्टी में थे पर अब समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं. रागिनी की शिक्षा और पारिवारिक पृष्ठभूमि ने उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को गहरा बनाया है. उनके पति संबित मलिक से उनका प्रेम विवाह हुआ है, जो डर्मेटोलॉजिस्ट हैं.
राजनीति में उनका निर्णायक पक्ष होने के बावजूद, वे समाज में महिलाओं की समस्याओं और उनके अधिकारों पर लगातार आवाज उठाती हैं. उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक न्याय के लिए उन्हें राजनीति में रहना जरूरी है. उनके फैसले और भाषण इसके प्रतीक हैं. उनको समाजवादी पार्टी के भीतर भी गंभीरता से लिया जाता है और उन्हें आगामी चुनावों में फिर से मौका मिलने की संभावना है.
रागिनी सोनकर के भाषण और राजनीतिक व्यवहार ने उन्हें एक प्रभावशाली नेता बना दिया है जो सीधे सरकार के विरोध में आवाज उठाने से नहीं घबरातीं. उनकी प्रखरता और स्पष्टवादिता से उनका व्यक्तित्व और मजबूत होता दिखता है. इसके साथ ही वे सामाजिक न्याय और महिलाओं के उत्थान के मुद्दों पर लगातार काम कर रही हैं.
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