बलिया की राजनीति से निकलकर प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली सीमा राजभर इन दिनों उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) से नाता तोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थामने वाली सीमा राजभर ने बहुत कम समय में खुद को राजभर समाज की एक प्रखर महिला नेता के रूप में स्थापित किया है.
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सुभासपा से सपा तक: संघर्ष और बदलाव का सफर
सीमा राजभर का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. साल 2022 में उन्होंने ओम प्रकाश राजभर की पार्टी पर परिवारवाद और महिलाओं के शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी की साइकिल की सवारी चुनी. अखिलेश यादव ने उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें सपा महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी.
निजी जीवन और राजनीतिक संकल्प
सीमा राजभर का जीवन व्यक्तिगत संघर्षों से भी जुड़ा रहा है. उनके पहले पति राजकुमार राजभर के निधन के बाद उन्होंने संदीप राजभर से विवाह किया. इन तमाम व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद उन्होंने राजनीति में अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दी. उनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को राजनीति की मुख्यधारा से जोड़ना और राजभर समाज के हितों की रक्षा करना है.
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