पूर्वांचल की बात: कितना ही बड़ा धर्मगुरु क्यों न हो दंड मिलना चाहिए...शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के विरोध में उतरे जगतगुरु बालकदेवाचार्य ने ये सब कह दिया

पूर्वांचल की बात: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे पॉक्सो आरोपों के बीच अब जगतगुरु बालकदेवाचार्य ने भी अपना विरोध दर्ज कराया है. उन्होंने संतों की मर्यादा और नैतिकता पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की.

रजत सिंह

• 08:06 PM • 26 Feb 2026

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वाराणसी के श्री विद्या मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे पॉक्सो एक्ट के आरोपों ने संतों के बीच भी दरार पैदा कर दी है. जहां एक ओर मठ के सेवादार इन आरोपों को साजिश बता रहे हैं. वहीं अब जगतगुरु बालकदेवाचार्य ने शंकराचार्य के विरोध में कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने इन आरोपों को सनातन धर्म की मर्यादा पर चोट बताया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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'मर्यादा का उल्लंघन अक्षम्य'

जगतगुरु बालकदेवाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने संकेत दिया कि यदि आरोप लगे हैं तो उनके पीछे कुछ न कुछ ठोस आधार जरूर होगा. उन्होंने इसे केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि पूरे संन्यासी समाज की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा. बालकदेवाचार्य ने कहा कि बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों (पॉक्सो एक्ट) में आरोप लगना कोई सामान्य बात नहीं है.उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बार-बार एक ही मठ या व्यक्ति के आसपास ऐसे विवाद क्यों पैदा होते हैं? उन्होंने कहा कि यदि सत्यता है तो कानून को अपना काम करना चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार का धार्मिक कवच नहीं लेना चाहिए.

निष्पक्ष जांच की मांग

उन्होंने प्रशासन और सरकार से अपील की कि इस पूरे प्रकरण की बिना किसी दबाव के जांच की जाए. बालकदेवाचार्य ने कहा कि सत्य सामने आना चाहिए ताकि सनातन धर्म के प्रति लोगों की आस्था बनी रहे. उनके अनुसार यदि कोई गलत है, तो उसे दंड मिलना ही चाहिए, चाहे वह कितना ही बड़ा धर्मगुरु क्यों न हो. वीडियो से यह स्पष्ट होता है कि शंकराचार्य विवाद ने हिंदू धर्मगुरुओं को दो धड़ों में बांट दिया है. एक पक्ष इसे स्वामी रामभद्राचार्य और अन्य विरोधियों की साजिश बता रहा है. जबकि बालकदेवाचार्य जैसे गुरु इसे नैतिकता और शुचिता का प्रश्न मान रहे हैं.