अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावे को लेकर बड़ा बवाल...दानदाताओं के बयान से खुल रही परतें, क्या है पूरा सच?

Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है. मुंबई के व्यापारी अनिल विश्वकर्मा सहित कई दानदाताओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं.

यूपी तक

• 05:34 PM • 20 Jun 2026

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Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं को लेकर जांच लगातार जारी है. इस मामले ने मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच टीम अब दानदाताओं, पुजारियों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई कर रही है.

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दानदाताओं के बयान बने जांच की अहम कड़ी

इस पूरे मामले में दानदाताओं के बयान जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं. जांच टीम उन सभी लोगों से संपर्क कर रही है जिन्होंने मंदिर में बहुमूल्य आभूषण और धार्मिक सामग्री भेंट की थी. मुंबई के व्यापारी अनिल विश्वकर्मा का बयान भी दर्ज किया गया है. उन्होंने रामलला के लिए चांदी का हार और चरण पादुका भेंट की थी, जिसकी जांच अब की जा रही है.

3 किलो चांदी के हार और चरण पादुका पर सवाल

महंत विनोद मिश्रा के अनुसार, व्यापारी अनिल विश्वकर्मा ने लगभग 3 किलो चांदी का हार और 1 किलो चांदी की चरण पादुका रामलला को भेंट की थी. हालांकि आरोप यह है कि ये कीमती आभूषण गर्भगृह तक सही तरीके से नहीं पहुंचे और बाद में इनके गायब होने की बात सामने आई. दानदाता परिवार को न तो रसीद दी गई और न ही कोई प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध कराया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं.

215 किलोमीटर नंगे पांव यात्रा कर पहुंचा था भक्त परिवार

इस विवाद के बीच एक और मामला सामने आया है जिसमें एक भक्त परिवार ने भगवान राम के श्रृंगार के लिए लगभग 215 किलोमीटर की पैदल यात्रा नंगे पांव करके अयोध्या पहुंचकर आभूषण भेंट किए थे. लेकिन आरोप है कि उनकी दी गई सामग्री का सही उपयोग नहीं हुआ और आठ महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई रसीद, प्रमाण या फोटो उपलब्ध नहीं कराई गई. इससे भक्तों की आस्था को गहरा झटका लगा है.

टिन्नू यादव पर गंभीर आरोप

चंपत राय के विश्वस्त सहयोगी टिन्नू यादव, जो उनके ड्राइवर भी बताए जाते हैं, पर पुजारियों ने आभूषण छुपाने के आरोप लगाए हैं. आरोप है कि मंदिर प्रशासन से जुड़े कुछ लोगों ने दान की गई कीमती वस्तुओं का दुरुपयोग किया और उन्हें निजी उपयोग में भी शामिल किया गया.

ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस पूरे मामले के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं. संत-महंतों का कहना है कि ट्रस्ट को बड़ी मात्रा में दान मिलने के बावजूद प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी है. उनका आरोप है कि गलत संचालन के कारण भक्तों की आस्था प्रभावित हो रही है.

संत-महंतों की मांग: नया ट्रस्ट बने

कई साधु-संतों और महंतों ने मांग की है कि वर्तमान ट्रस्ट को भंग किया जाए और एक नया ट्रस्ट बनाया जाए जिसमें संत समाज का अधिक प्रतिनिधित्व हो. उनका कहना है कि केवल ऐसा ही ढांचा मंदिर के कार्यों में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित कर सकता है.

जांच जारी, बयान दर्ज किए जा रहे

सीआईटी (SIT) द्वारा इस मामले में मुंबई के व्यापारी अनिल विश्वकर्मा सहित कई लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. जांच अभी जारी है और अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की गहन जांच के बाद ही निष्कर्ष निकाला जाएगा.