राम मंदिर चंदा घोटाले में बड़ा ट्विस्ट! 8 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद बड़े पदाधिकारियों को लेकर उठे सवाल

UP News: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में नोटों की गिनती में हेराफेरी, कर्मचारियों की कथित मिलीभगत और करोड़ों रुपये के गबन की आशंका सामने आई है.

यूपी तक

• 01:30 PM • 27 Jun 2026

follow google news

UP News: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार तेज होती जा रही है. पुलिस ने अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर मंदिर में चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन के दौरान हेराफेरी कर चोरी करने का आरोप है. जांच के दौरान करुणेश पांडे, टिन्नू यादव, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला और राम शंकर मिश्रा के नाम सामने आए हैं. आरोप है कि नोटों की गिनती के दौरान कर्मचारियों की आपसी मिलीभगत से गड़बड़ी की जाती थी. इस मामले में लवकुश मिश्रा के घर से बड़ी रकम बरामद होने की बात भी सामने आई है. वहीं टिन्नू यादव को चंपत राय का ड्राइवर बताया जा रहा है, जबकि सुभाष चंद्र श्रीवास्तव बैंक से जुड़ी नोट गिनने की प्रक्रिया की निगरानी करते थे.

यह भी पढ़ें...

जांच आगे बढ़ने के साथ ही मंदिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं. विपक्ष का आरोप है कि पूरे मामले में केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि बड़े जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. चर्चाओं में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव जैसे नाम भी सामने आ रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया है, जबकि गोपाल राव की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है और विपक्ष लगातार जवाबदेही की मांग कर रहा है.

जांच में यह भी सामने आया है कि नोटों की गिनती के दौरान गड्डियों में अतिरिक्त नोट रखकर बाद में उन्हें निकाल लिया जाता था, जिससे चढ़ावे की रकम में हेराफेरी की जाती थी. इस तरीके से करोड़ों रुपये के गबन की आशंका जताई जा रही है. मामला भगवान राम और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. ऐसे में लोग निष्पक्ष जांच, सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मंदिर की प्रतिष्ठा तथा श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं.