UP Vidhan Sabha Debate: उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान संविदा कर्मियों और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच सदन में तीखी बहस और हंगामा हुआ. आजमगढ़ से सपा विधायक अखिलेश यादव ने संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के शोषण का मुद्दा उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां बदलने पर पुराने कर्मचारियों को हटा दिया जाता है. कंपनियां कर्मचारियों से मोटी रकम लेकर भर्ती करती हैं और उनके पास भविष्य की कोई सुरक्षा नहीं होती. उन्होंने आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज का उदाहरण दिया, जहां नई एजेंसी आने के बाद 110 पुराने कर्मचारियों (वार्ड बॉय, ड्राइवर, गार्ड) की छंटनी कर दी गई, जो पिछले कई महीनों से बेरोजगार हैं.
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डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने स्पष्ट किया कि आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने के लिए निजी एजेंसी को हटाकर भूतपूर्व सैनिक निगम को काम दिया गया है. उन्होंने बताया कि सैनिक निगम में केवल सेना से रिटायर जवानों को ही रखा जाता है, इसलिए पुराने निजी गार्डों को वहां एडजस्ट नहीं किया जा सकता. मंत्री ने यह भी कहा कि जिन लोगों की जमीनें मेडिकल कॉलेज के लिए ली गई थीं, उनके आश्रितों को नौकरी देने का कोई लिखित एग्रीमेंट पिछली सरकार के समय नहीं हुआ था, वरना इसे लागू किया जाता.
यह चर्चा राज्यपाल के अभिभाषण पर हो रही थी. विपक्षी दल उत्तर प्रदेश में नई भर्तियों और रोजगार के मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं. यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट सत्र है, क्योंकि अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. सदन में हुई इस बहस ने यह साफ कर दिया कि संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों की नौकरी की सुरक्षा एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है.
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