गाजियाबाद डंपिंग ग्राउंड विवाद: किसानों पर लाठीचार्ज के बाद बढ़ा आक्रोश, 16 गांवों ने लिया आर-पार का फैसला

Ghaziabad Dumping Ground Dispute: गाजियाबाद के लोनी में डंपिंग ग्राउंड को लेकर संग्राम! बुजुर्ग किसानों पर पुलिस की लाठियां और 16 गांवों का गुस्सा. क्या प्रशासन हटाएगा कूड़ा घर? देखिए यूपी तक की एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट.

यूपी तक

• 03:10 PM • 17 Feb 2026

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गाजियाबाद के मीरपुर हिंदू गांव और आसपास के 16 गांवों के किसानों का डंपिंग ग्राउंड (कूड़ा घर) के खिलाफ आक्रोश चरम पर है. 15 फरवरी को हुए कथित पुलिस लाठीचार्ज के बाद किसानों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. किसानों का आरोप है कि 15 फरवरी को जब वे शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे, तब पुलिस ने उन पर लाठियां बरसाईं. बुजुर्ग किसान राजेंद्र और लाला सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हें गंभीर चोटें आई हैं. राजेंद्र का दावा है कि खुद एसीपी ने उन पर लाठियां चलाईं. 

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एक अन्य बुजुर्ग किसान मोहम्मददीन ने बताया कि पुलिस ने उन्हें धक्के दिए, जबकि वह पहले से ही घुटनों की बीमारी से जूझ रहे थे. किसानों का कहना है कि यह डंपिंग ग्राउंड 125 बीघा में बनाया गया है, जो चारों ओर से हरी-भरी फसलों और खेतों से घिरा है. इससे फसलों को नुकसान होगा और आने वाली पीढ़ियां बीमार होंगी. प्रस्तावित स्थल के पास गुरु गोरखनाथ मंदिर और काली सिंह बाबा का मंदिर है. साथ ही, बदरपुर और पचारा जैसे गांव मात्र 100-150 मीटर की दूरी पर हैं. 

यह स्थल यमुना नदी से केवल 1.5 किलोमीटर दूर है, जिससे जल प्रदूषण का खतरा भी है. मीरपुर हिंदू गांव को पूर्व सांसद वी.के. सिंह ने गोद लिया था. ग्रामीणों का कहना है कि गोद लिए गांव को विकास के बजाय 'कूड़ा घर' दिया जा रहा है. पुलिस का कहना है कि किसानों ने गेट का ताला और सीसीटीवी कैमरे तोड़े, जिस कारण बल प्रयोग करना पड़ा. एसीपी सिद्धार्थ गौतम ने लाठीचार्ज के आरोपों से इनकार किया है. 

मामले को सुलझाने के लिए नगर निगम कमिश्नर, एसडीएम और किसानों के बीच उच्च स्तरीय बैठक होनी है. किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि डंपिंग ग्राउंड नहीं हटाया गया, तो वे अपनी जान दे देंगे लेकिन इसे चलने नहीं देंगे.