उत्तर प्रदेश के शामली जिले के बहुचर्चित कथित धर्मांतरण मामले में नया मोड़ आ गया है. इस पूरे प्रकरण पर यूपी Tak की टीम ने पीड़ित युवक आयुष मलिक के पिता देवराज मलिक से ग्राउंड जीरो पर विशेष बातचीत की. इंटरव्यू के दौरान पीड़ित पिता का दर्द छलक उठा. देवराज मलिक ने अपनी ही सरकार और प्रशासन के सामने गुहार लगाते हुए आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत उनके होनहार बेटे का ब्रेनवॉश किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य उनके परिवार की नामचीन प्रतिष्ठा और करोड़ों रुपये की जायदाद को हड़पना है.
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'बेटे की दाढ़ी और पैसों की मांग से खुला राज'- देवराज मलिक
पिता ने कहा, "मुझे तो इस बात का पता तब चला जब मैंने पुलिस प्रशासन में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई. अब कोई उसे मोहम्मद अली बता रहा है, कोई रहमान तो कोई कुर्बान कह रहा है, लेकिन मेरे लिए तो वह हमेशा आयुष मलिक ही रहेगा." देवराज के अनुसार, आयुष के रहन-सहन में आए बदलाव और अचानक उसकी बढ़ी हुई दाढ़ी को देखकर उन्हें कुछ गड़बड़ होने का अंदेशा हुआ. जब उन्होंने बेटे से दाढ़ी कटवाने को कहा, तो उसने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और बात को टाल दिया.
जनवरी के आखिरी सप्ताह में जब दूसरे पक्ष (चांदनी के परिवार) की तरफ से अचानक पैसों की भारी मांग होने लगी और संपत्ति नाम कराने का दबाव बनाया जाने लगा, तब पिता को पूरा माजरा समझ आया. उन्होंने जब आयुष से इस संवेदनशील मुद्दे पर प्यार से बात सुलझाने की कोशिश की, तो मानसिक रूप से पूरी तरह प्रभावित हो चुका आयुष कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुआ और गोलमोल जवाब देने लगा.
'प्रेम जाल में फंसाकर करोड़ों की प्रॉपर्टी हड़पने की है साजिश'
पिता ने दावा किया, "लड़के तो उनके समुदाय में भी इससे ज्यादा स्मार्ट मिल जाते, लेकिन उनकी निगाह एक नामचीन बच्चे पर थी. आयुष के पास नाम, काम और दाम, सब कुछ पर्याप्त मात्रा में है. हमारी करीब ₹100 करोड़ से ज्यादा की जो वर्थ और प्रॉपर्टी है, मुख्य उद्देश्य उसी को हड़पने का है." देवराज मलिक का आरोप है कि चांदनी कुरैशी ने पहले उनके बेटे को अपने प्रेम जाल में फंसाया. इसके बाद कुछ अंतरराज्यीय स्तर पर काम कर रहे मौलवियों और बाहरी लोगों की मदद से उसका पूरी तरह से ब्रेनवॉश कर दिया गया.
उन्होंने आरोप लगाया कि इस रैकेट में शामिल लोगों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज और एक नकली निकाहनामा तैयार किया ताकि कानूनी रूप से संपत्ति पर दावा ठोका जा सके. हालांकि कई सालों से उन्हें सिर्फ यह पता था कि दोनों के बीच केवल फोन पर सामान्य बातचीत होती है.
'बचपन से बेहद संस्कारी और मेहनती था आयुष'
देवराज मलिक ने कहा, "आयुष स्वभाव से बहुत ही बढ़िया, संस्कारी, मेहनती, निष्ठावान और मिलनसार बच्चा था. उसमें एक अच्छे बच्चे की सारी खूबियां थीं. मैंने प्राथमिकी दर्ज कराने से पहले स्थानीय पुलिस अधीक्षक से मिलकर भी रोते हुए कहा था कि भले ही मेरा बेटा बी-फार्मा है, लेकिन उसका दिमाग किसी आईएसपीसीएस अधिकारी के बराबर सक्षम है."
पीड़ित पिता ने सीधे तौर पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि चांदनी कुरैशी ने इस प्रॉपर्टी के चक्कर में उनके हंसते-खेलते घर को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है. बातचीत के अंत में उन्होंने शामली के पुलिस अधीक्षक, क्षेत्रीय अधिकारी और स्थानीय कोतवाल साहब का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से इस पूरे मामले पर त्वरित कानूनी कार्रवाई संभव हो सकी.
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