UP Success Story: अक्सर कहा जाता है कि अगर मेहनत का साथ सही मौके से मिल जाए तो मुश्किल हालात भी बदलने में देर नहीं लगती. सरकारी योजनाओं का असली मकसद भी यही होता है कि वे जरूरतमंद लोगों को केवल आर्थिक मदद न दें, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर भी दें. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के काकोरी ब्लॉक की रहने वाली सुमन की कहानी इसी बदलाव की एक मिसाल है. आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सरकारी योजना के सहयोग से अपना छोटा कारोबार शुरू कर आज आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है.
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आर्थिक चुनौतियों के बीच नहीं छोड़ा हौसला
लखनऊ जिले के विकास खंड काकोरी की निवासी सुमन लंबे समय से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही थीं. सीमित संसाधनों के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं था. हालांकि उन्होंने कठिन परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय स्वरोजगार का रास्ता चुना.
सरकारी योजना से मिला सहारा
सुमन को बाबा साहब आंबेडकर रोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत 1.08 लाख रुपये का लोन मिला. इस आर्थिक सहायता ने उनके लिए नया रास्ता खोल दिया. लोन मिलने के बाद उन्होंने दोना-पत्तल निर्माण इकाई की स्थापना की और अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया.
शुरुआत में आईं कई मुश्किलें
किसी भी नए कारोबार की तरह सुमन के सामने भी शुरुआती दौर में कई चुनौतियां थीं. उत्पादन से लेकर बाजार तक अपनी पहचान बनाने में उन्हें मेहनत करनी पड़ी. लेकिन उन्होंने लगातार प्रयास जारी रखे और सरकारी सहयोग के साथ अपने काम को आगे बढ़ाती रहीं.
आज बाजार में बन चुकी है पहचान
लगातार मेहनत का परिणाम यह रहा कि आज सुमन के बनाए दोना-पत्तल स्थानीय बाजार में अपनी पहचान बना चुके हैं. उनके उत्पादों की मांग बढ़ी है और उनका छोटा उद्योग अब नियमित रूप से चल रहा है.
हर महीने हो रही 12 हजार रुपये तक की आय
सरकारी योजना के सहयोग और अपने प्रयासों के दम पर सुमन अब हर महीने करीब 12 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं. इससे वह अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को आत्मविश्वास के साथ पूरा कर रही हैं और आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ रही हैं.
दूसरों के लिए बनीं प्रेरणा
सुमन की कहानी बताती है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए और उसके साथ मेहनत व दृढ़ संकल्प जोड़ा जाए, तो सीमित संसाधनों के बावजूद आत्मनिर्भर बनने का सपना साकार किया जा सकता है. बाबा साहब आंबेडकर रोजगार प्रोत्साहन योजना उनके लिए सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि नई शुरुआत का माध्यम साबित हुई.
क्या है बाबा साहब आंबेडकर रोजगार प्रोत्साहन योजना?
उत्तर प्रदेश सरकार की बाबा साहब आंबेडकर रोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए ₹2 लाख से ₹5 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है. इस योजना का उद्देश्य युवाओं को अपना व्यवसाय स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता देना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना है. योजना के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग लाभार्थियों को ₹70,000 तक, जबकि सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को ₹50,000 तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिससे व्यवसाय शुरू करने का आर्थिक बोझ कम होता है और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है.
इस योजना का लाभ कैसे उठा सकते हैं आप?
इस योजना का लाभ वही ग्रामीण निवासी उठा सकते हैं जिनके परिवार की सभी स्रोतों से वार्षिक आय ₹2 लाख से अधिक न हो और जिनकी आयु 18 से 65 वर्ष के बीच हो. योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक व्यक्ति अपने व्यवसाय से संबंधित परियोजना प्रस्ताव (प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के साथ अपने विकास खंड (ब्लॉक) कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं. इसके बाद जिला स्तरीय चयन समिति आवेदन की जांच कर पात्र लाभार्थियों का चयन करती है.
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