उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल दफ्तर की फाइलों, सरकारी गलियारों या ट्रांसफर-पोस्टिंग की खबरों तक सीमित नहीं रहते. उनके फैसले, कड़क प्रशासनिक कार्रवाइयां और बयान सीधे तौर पर राज्य की राजनीति को प्रभावित करते हैं. मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर रहे 2005 बैच के सिक्किम कैडर के आईएएस अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह एक ऐसा ही चर्चित नाम हैं.
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उत्तर प्रदेश में उनका प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) कार्यकाल 14 अगस्त को समाप्त हो चुका है. आठवां सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) न मिलने के बाद वे 2 महीने की छुट्टी पर चले गए हैं. अब सियासी और प्रशासनिक हलकों में यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि क्या उन्हें केंद्र से आगे का एक्सटेंशन मिलेगा या फिर उन्हें अपने मूल कैडर यानी नॉर्थ-ईस्ट (सिक्किम) वापस लौटना पड़ेगा.
योगी सरकार में बने 'कड़क' और भरोसेमंद अफसर
आंजनेय कुमार सिंह 16 फरवरी 2015 को पहली बार प्रतिनियुक्ति पर उत्तर प्रदेश आए थे. उस समय प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार थी.शुरुआती दिनों में उन्होंने सिंचाई और वाणिज्य कर विभाग में अपनी सेवाएं दीं और बुलंदशहर व फतेहपुर के जिलाधिकारी रहे.
हालांकि 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो आंजनेय सिंह की गिनती सरकार के सबसे भरोसेमंद और कड़क छवि वाले अफसरों में होने लगी. 2021 में उन्हें मुरादाबाद मंडल का कमिश्नर नियुक्त किया गया था.
जब आजम खान के साम्राज्य से टकराए आंजनेय सिंह
आंजनेय सिंह के प्रशासनिक करियर का सबसे चर्चित और विवादित अध्याय 2019 में शुरू हुआ जब उन्हें रामपुर का जिलाधिकारी बनाया गया. उस समय रामपुर को समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खान का अभेद्य राजनीतिक गढ़ माना जाता था.
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान आजम खान और तत्कालीन डीएम आंजनेय सिंह के बीच सीधी तल्खी देखने को मिली. चुनाव प्रचार के दौरान आजम खान के विवादित बयानों के बाद आंजनेय सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए आचार संहिता उल्लंघन, विवादित बयानबाज़ी और जौहर यूनिवर्सिटी के लिए जमीनों के अवैध कब्जे जैसे कई गंभीर मामलों में मुकदमे दर्ज करवाए.
इस टकराव के कारण आजम खान पर प्रशासनिक शिकंजा कसता चला गया जिससे न सिर्फ उनका राजनीतिक वर्चस्व प्रभावित हुआ बल्कि बाद में उन्हें जेल तक जाना पड़ा. रामपुर में हुई इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई को राज्य की राजनीति में 'रामपुर मॉडल' के नाम से जाना गया.
संभल हिंसा और अखिलेश यादव के साथ जुबानी जंग
24 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा के समय भी मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर के रूप में आंजनेय सिंह मैदान में डटे रहे. उन्होंने संभल के तत्कालीन डीएम राजेंद्र पैंसिया और एसएसपी केके विश्नोई के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने की कमान संभाली.
हिंसा के बाद जब समाजवादी पार्टी ने सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े किए तो सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और आंजनेय सिंह के बीच बयानबाज़ी और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. अखिलेश यादव ने उनकी भूमिका और निष्पक्षता पर खुले तौर पर सवाल उठाए, जबकि आंजनेय सिंह ने स्पष्ट किया कि पुलिस और प्रशासन केवल साक्ष्यों और कानून के दायरे में रहकर जिम्मेदारी से काम करते हैं.
सपा कार्यालय खाली कराने से लेकर कोविड प्रबंधन तक का सफर
मुरादाबाद कमिश्नर रहते हुए सपा कार्यालय (जिसे कभी मुलायम सिंह यादव की कोठी के रूप में जाना जाता था) को खाली कराने की कार्रवाई हो या पत्रकारों के साथ तीखी बहस के मामले, आंजनेय सिंह लगातार सुर्खियों में बने रहे.दूसरी ओर कोविड-19 महामारी के दौरान रामपुर में उनके द्वारा किए गए राहत और स्वास्थ्य प्रबंधन कार्यों की व्यापक सराहना भी हुई थी.
फिलहाल 2 महीने की छुट्टी पर गए आंजनेय सिंह के अगले कदम को लेकर सस्पेंस बरकरार है. क्या लखनऊ और दिल्ली के गलियारों से उन्हें आठवां सेवा विस्तार मिलेगा या यूपी में उनके 9 साल से ज्यादा लंबे और सियासी-प्रशासनिक उतार-चढ़ावों से भरे सफर का अंत होगा, यह आने वाले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा.
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