Janmashtami 2024: कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिर नहीं जा पा रहे हैं तो घर पर कर लें ये पांच काम

ऐसी मान्यता है कि भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि को कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में भगवान कृष्ण ने अवतार लिया था. इसलिए इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी या जन्माष्टमी का पर्व मनाते हैं.

Krishna Janmashtami Celebration

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26 Aug 2024 (अपडेटेड: 26 Aug 2024, 01:15 PM)

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Krishna Janmashtami: देश भर में धूमधाम से आज (26 अगस्त) जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जा रहा है. सभी मंदिरों को सुंदर तरीके से सजा दिया गया है. हर कोई श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन होकर पूजा पाठ कर रहा है. ऐसी मान्यता है कि भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि को कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में भगवान कृष्ण ने अवतार लिया था. इसलिए इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी या जन्माष्टमी का पर्व मनाते हैं. ऐसे में हर कोई आज के दिन श्रीकृष्ण के मंदिर जाकर आशीर्वाद प्राप्त करता है. लेकिन अगर आप इस बार किसी कारण मंदिर नहीं जा पा रहे हैं तो निराश होने की जरूरत नहीं है. आप घर पर ही आप कुछ आसान तरीकों से जन्माष्टमी का त्योहार मना सकते हैं.

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घर पर कैसे मनाएं जन्माष्टमी?

1.जन्माष्टमी मनाने के लिए सबसे पहले घर में स्थापित मंदिर को सुंदर से तरीके से सजाएं. अब मंदिर में रखे बाल गोपाल का शृंगार कर उन्हें एक चौकी पर लाल रंग के आसन या पालने में विराजित करें. माथे पर मोर पंख का मुकुट सजाएं और हाथ में नई बांसुरी थमाएं. ऋृंगार के लिए चंदन और वैजयंती के माला का प्रयोग जरूर करें. 

2. इसके बाद श्रीकृष्ण का पसंदीदा प्रसाद अर्पित करें. कुछ पारंपरिक प्रसादों में फूल, फल, मिठाइयां, दूध और दही और मख्खन शामिल है. 

3. इस दौरान आप भगवान श्रीकृष्ण का भजन किर्तन कर सकते हैं. भजन करने से पूरे घर में शांति और सुकून की अनुभूति महसूस की जा सकती है.

4. रात को 12 बजे शुभ मुहूर्त में उन्हें खीरे से निकालकर दूध, दही, शहद, घी, गंगा जल व शक्कर से बनाए गए पंचामृत से स्नान कराएं.

5. इस दौरान आप रात्रि जागरण भी कर सकते हैं. आप रात्रि जागरण के दौरान भजन गा सकते हैं, कथा सुन सकते हैं या ध्यान कर सकते हैं.

इन दिव्य मंत्रों का करें जाप

-  कृं कृष्णाय नमः
-  ॐ देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
- ओम क्लीम कृष्णाय नमः
-  गोकुल नाथाय नमः
-  ऊँ नमो भगवते श्रीगोविन्दाय नम: