GST Officer Prashant Singh Brother Allegations: सीएम योगी के समर्थन में इस्तीफा देने वाले अयोध्या के प्रशांत सिंह का रोते हुए वीडियो ने सोशल मीडियाा पर खूब सुर्खियां बटोंरी थीं. लेकिन प्रशांत सिंह का वीडियो वायरल होने के बाद से ही उनके भाई विश्वजीत सिंह ने दस्तावेजों के साथ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशांत ने 2009 में मऊ सीएमओ को धोखे में रखकर 40% दिव्यांगता का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया और 2011 में पीसीएस कोटा हासिल किया था. ठीक इसी तरह उनकी बहन जया सिंह ने भी 2013 में उसी डॉक्टर और उसी सीएमओ के हस्ताक्षर से फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर तहसीलदार की कुर्सी पाई. यूपी Tak से खास बातचीत में विश्वजीत सिंह ने कहा कि जब जांच का घेरा सख्त हुआ है तो प्रशांत सिंह इस्तीफे का नाटक कर जांच और भविष्य की रिकवरी से बचना चाहते हैं.
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जांच से लगातार भागने का आरोप
विश्वजीत सिंह के अनुसार उन्होंने 16 अगस्त 2021 को मऊ सीएमओ से प्रशांत सिंह के खिलाफ शिकायत की थी. सीएमओ की शुरुआती जांच में प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए जिसके बाद प्रशांत और उनकी बहन जया सिंह को मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए कई बार बुलाया गया. विश्वजीत ने बताया कि 28 सितंबर और 7 अक्टूबर 2021 को मेडिकल बोर्ड बैठा. लेकिन प्रशांत हाजिर नहीं हुए. उनकी बहन जया सिंह के लिए भी तीन बार बोर्ड बैठाया गया.लेकिन वे भी जांच से बचती रहीं.
इस दौरान विश्वजीत सिंह ने स्वास्थ्य महानिदेशालय (DG Health) की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि मऊ सीएमओ ने 19 दिसंबर 2025 को डीजी हेल्थ को अर्जेंट पत्र लिखकर कार्रवाई का निर्देश मांगा था. लेकिन महानिदेशालय ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल रखा है. विश्वजीत का आरोप है कि अब तक प्रशांत सिंह जांच को मैनेज करते आ रहे थे.लेकिन अब मामला हाथ से निकलते देख उन्होंने इस्तीफे का इमोशनल कार्ड खेला है.
विश्वजीत सिंह ने कहा कि 'प्रशांत सिंह ने एक असली विकलांग व्यक्ति का हक मारा है. मैं मीडिया और मुख्यमंत्री से निवेदन करता हूं कि इन्हें सिस्टम में रखकर जांच पूरी कराई जाए. इस्तीफा देकर भागने का मौका न दिया जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.' उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस शिकायत के बाद उन्हें भाई-बहन की ओर से धमकियां भी मिल रही हैं.प्रशांत की छोटी बहन जया सिंह वर्तमान में कुशीनगर के हाटा में तहसीलदार हैं. उन पर भी समान प्रक्रिया से फर्जीवाड़ा करने का आरोप है. भाई का दावा है कि दोनों के प्रमाण पत्र एक ही दिन, एक ही डॉक्टर और एक ही सीएमओ की मुहर से बने हैं जो इनकी संलिप्तता को साबित करता है.
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