दिल्ली से वाराणसी जाने में अभी ट्रेन से कई घंटे लगते हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में यही सफर करीब 3 घंटे 50 मिनट में पूरा करने की योजना है. भारतीय रेलवे देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी कर रहा है. इनमें उत्तर प्रदेश से जुड़े दो अहम रूट दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं. इन कॉरिडोर के बनने से यूपी के यात्रियों को तेज रेल कनेक्टिविटी मिलने के साथ कारोबार, पर्यटन और दूसरे शहरों तक पहुंचने के नए अवसर मिल सकते हैं.
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की थी. सरकार का उद्देश्य इन्हें शहरों के विकास को गति देने वाले कनेक्टर के रूप में तैयार करना है. इन रूटों पर यात्रा का समय काफी कम करने की योजना है. हालांकि, अभी इन प्रस्तावित कॉरिडोर पर सफर शुरू होने की कोई निश्चित तारीख नहीं दी गई है.
यूपी के लिए क्यों अहम हैं ये दो हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर?
उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल है. यहां धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र हैं तो दिल्ली-एनसीआर से लेकर पूर्वांचल तक रोजगार, कारोबार और शिक्षा के लिए बड़ी संख्या में लोग यात्रा करते हैं. तेज रफ्तार रेल नेटवर्क इन शहरों के बीच दूरी को समय के लिहाज से कम कर सकता है.
1. दिल्ली से वाराणसी: करीब 3 घंटे 50 मिनट में सफर
दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का मकसद राष्ट्रीय राजधानी को पूर्वी उत्तर प्रदेश से तेज रेल कनेक्टिविटी देना है. प्रस्तावित योजना के मुताबिक, दोनों शहरों के बीच यात्रा में करीब 3 घंटे 50 मिनट लग सकते हैं.
इस रूट से वाराणसी आने-जाने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों, कारोबारियों और काम के सिलसिले में यात्रा करने वाले लोगों को फायदा मिल सकता है. वाराणसी के साथ आसपास के शहरों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है.
इस कॉरिडोर को केवल दिल्ली और वाराणसी के बीच तेज सफर तक सीमित नहीं रखा गया है. इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के साथ दिल्ली को जोड़ने वाले आर्थिक क्षेत्र को भी बढ़ावा देना है. इससे पर्यटन और कारोबार से जुड़ी गतिविधियों को गति मिल सकती है.
2. वाराणसी से सिलीगुड़ी: पटना के रास्ते करीब 2 घंटे 55 मिनट
यूपी के लिहाज से दूसरा अहम प्रस्ताव वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर है. इस रूट पर वाराणसी से सिलीगुड़ी तक का सफर पटना के रास्ते करीब 2 घंटे 55 मिनट में पूरा करने की योजना है.
कॉरिडोर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के धार्मिक, शैक्षणिक और चिकित्सा केंद्रों को जोड़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे पूर्वी भारत में तेज रेल कनेक्टिविटी का विस्तार करने की योजना है.
वाराणसी से बिहार और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाले यात्रियों को इससे लाभ मिल सकता है. हालांकि, वास्तविक फायदा इस बात पर भी डिपेंड करेगा कि कॉरिडोर का निर्माण कब पूरा होता है और किन शहरों में स्टेशन बनाए जाते हैं.
बाकी पांच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर कौन से हैं?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने सात प्रस्तावित कॉरिडोर में पांच अन्य रूट भी शामिल किए हैं. इनका उद्देश्य देश के प्रमुख औद्योगिक, कारोबारी और तकनीकी केंद्रों के बीच यात्रा का समय कम करना है.
- मुंबई-पुणे: इन दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय घटाकर करीब 48 मिनट करने की योजना है. ये पश्चिम भारत के प्रमुख शहरी केंद्रों को जोड़ेगा.
- पुणे-हैदराबाद: महाराष्ट्र और तेलंगाना को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर पर यात्रा करीब 1 घंटे 55 मिनट में पूरी करने का लक्ष्य है.
- हैदराबाद-बेंगलुरु: दक्षिण भारत के दो प्रमुख तकनीकी और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने वाले इस रूट पर सफर करीब 2 घंटे का हो सकता है.
- हैदराबाद-चेन्नई: इस कॉरिडोर पर दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय करीब 2 घंटे 55 मिनट रखने की योजना है. इससे कारोबार और रोजगार के सिलसिले में आने-जाने वाले लोगों को फायदा मिल सकता है.
- चेन्नई-बेंगलुरु: इस रूट पर सफर करीब 1 घंटे 13 मिनट में पूरा करने का लक्ष्य है. इससे दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत हो सकती है.
क्या भारत में पहली बार बनेंगी स्वदेशी बुलेट ट्रेनें?
हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार के साथ भारत अपनी बुलेट ट्रेन बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है. देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर विकसित की जा रही है. इस परियोजना का पूरा रूट शुरू होने में अभी समय लगेगा, लेकिन गुजरात में इसके एक हिस्से को अगस्त 2027 तक यात्रियों के लिए खोलने की संभावना जताई गई है.
भारत में बुलेट ट्रेन और हाई-स्पीड रेल के विकास के लिए स्वदेशी निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है. सरकारी कंपनी BEML दो हाई-स्पीड ट्रेनों का निर्माण कर रही है. इन ट्रेनों के 2027 की पहली छमाही में परीक्षण के लिए तैयार होने की उम्मीद है.
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