मैनपुरी: हाई कोर्ट की फटकार के बाद छात्रा की मौत के मामले में नई SIT गठित, जानें पूरा केस

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उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्कूल की एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले की जांच के लिए डीजीपी ने नई एसआईटी गठित कर दी है. इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा यूपी पुलिस को कड़ी फटकार लगाने के बाद एडीजी कानपुर जोन की अगुवाई में 6 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम गठित की गई है.

इस मामले में यूपी के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकुल गोयल भी इलाहाबाद हाई कोर्ट में पेश हुए थे. 16 सितंबर 2019 को मैनपुरी में पढ़ने वाली कक्षा 11 की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. छात्रा की लाश स्कूल के हॉस्टल में फंदे से लटकी हुई मिली थी.

हाई कोर्ट ने पिछले दिनों इस मामले में यूपी पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा था कि पुलिस को प्रशिक्षण देने की जरूरत है, ज्यादातर विवेचना कॉन्स्टेबल करते हैं, दरोगा कभी-कभी जाते हैं. कोर्ट ने निर्देश देते हुए कहा था राज्य सरकार को अपने अधिकारियों को आदेश देना चाहिए कि रेप के मामलों में 2 महीने या सीआरपीसी के प्रावधानों में तय समय के भीतर जांच पूरी करें.

कोर्ट ने कहा निष्पक्ष विवेचना न होने से सजा का रेट 6.5 फीसदी है, जबकि विदेश में सजा का रेट 85 फीसदी है. अदालन ने कहा कि सही विवेचना न होने से अपराधी छूट रहे हैं.

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सुनवाई के दौरान डीजीपी ने इस मामले में, तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक मैनपुरी रहे ओमप्रकाश सिंह और सीओ प्रियांक जैन को निलंबित किए जाने की भी जानकारी दी थी.

इस मामले में हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मुनीश्वर नाथ भंडारी और जस्टिस एके ओझा की बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई की. याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर रही, बल्कि वो आरोपियों को बचा रही है और यहां तक कि एसआईटी भी स्वतंत्र काम नहीं कर रही.

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सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा, ”इस तरह के मामलों को हम बहुत गंभीरता से लेते हैं. यह मत सोचिए कि वो एक गरीब की बेटी थी, वो देश की बेटी थी.”

मंगलवार को बेंच ने पूरे मामले का रिकॉर्ड देखने के बाद कहा था कि इस मामले में पाया गया कि भले ही 16 सितंबर 2019 को हुई घटना की प्राथमिकी अगले ही दिन दर्ज हो गई थी, लेकिन आरोपी से पूछताछ समय पर नहीं की गई, बल्कि करीब 3 महीने बाद की गई.

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क्या है पूरा मामला?

16 सितंबर 2019 को एक 16 वर्षीय छात्रा का शव संदिग्ध परिस्थियों में छात्रावास में मिला था. पुलिस प्रथम दृष्टया इस घटना को खुदकुशी की ही मान रही थी. हालांकि छात्रा के परिजनों ने दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोप लगाया था.

इसके बाद आगरा फॉरेंसिक लैब ने कहा था कि लड़की के इनरवियर पर सीमन के निशान मिले हैं. हालांकि उस दौरान इस मामले की जांच कर रही एसआईटी टीम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था, ”इस बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले कुछ और जांच की जाएगी. हम डीएनए सैंपलिंग कर रहे हैं.”

जांच के दौरान 115 लोगों का डीएनए टेस्ट, 12 लोगों का पॉलीग्राफी टेस्ट हुया था. इस मामले में 300 से ज्यादा लोगों से पूछताछ के बाद भी आज तक एसआईटी टीम यह पता नहीं लगा सकी कि आखिर छात्रा की मौत की वजह क्या थी. अब जब हाई कोर्ट ने डीजीपी मुकुल गोयल को तलब किया तो यह मामला फिर से चर्चा में आया है.

प्रियंका गांधी ने लिखा था मुख्यमंत्री को लेटर

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इस मामले में ट्वीट कर पीड़ित परिवार के लिए संवेदना जताई थी, साथ ही, मुख्यमंत्री को लेटर भी भेजा था. कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिला था. मैनपुरी शहर में कैंडल मार्च निकाले गए थे. कई सामाजिक संगठनों ने भी पीड़ित परिवार से मिलकर संवेदना जताई थी. पीड़ित परिवार सीबीआई जांच की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गया था. तब जाकर 26 सितंबर 2019 को राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी थी.

हटाए गए थे डीएम-एसपी

दिसंबर 2019 में आगरा लैब की रिपोर्ट से इस मामले में खलबली मच गई थी. शासन ने तब थोड़ी गंभीरता दिखाई थी. तत्कालीन जिलाधिकारी प्रमोद कुमार उपाध्याय और एसपी अजय शंकर राय का 24 घंटे के अंतराल पर ट्रांसफर कर दिया गया था.

अब हाई कोर्ट की फटकार के बाद शासन ने तत्कालीन एएसपी ओम प्रकाश सिंह और सीओ प्रयांक जैन को निलंबित कर दिया है. मगर पीड़ित परिवार अभी भी न्याय मिलने का इंतजार कर रहा है.

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