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मंझनपुर सीट पर क्या इंद्रजीत सरोज को रोक पाएगी बीजेपी? अखिलेश यादव के ये कद्दावर दलित नेता देंगे टफ फाइट

मंझनपुर विधानसभा 2027 चुनाव में क्या इंद्रजीत सरोज की बादशाहत खत्म होगी? कौशांबी की इस पासी बाहुल्य सीट पर सपा और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला है. जानें क्या कहते हैं जातीय समीकरण और स्थानीय पत्रकारों की राय. क्या अखिलेश के दिग्गज नेता फिर मारेंगे बाजी?

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है. कौशांबी जिले की मंझनपुर (सुरक्षित) विधानसभा सीट पर सबकी निगाहें टिकी हैं. सवाल यह है कि क्या समाजवादी पार्टी के कद्दावर दलित नेता इंद्रजीत सरोज अपने इस अभेद्य किले को बरकरार रख पाएंगे या फिर भारतीय जनता पार्टी यहां कमल खिलाने में कामयाब होगी? कभी बसपा के स्तंभ रहे और अब सपा के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज इस सीट के इतिहास के पर्याय बन चुके हैं. 2024 में अपने बेटे पुष्पेंद्र सरोज को कौशांबी से सांसद बनवाकर उन्होंने अपनी ताकत का लोहा मनवा दिया है. लेकिन 2027 की राह उनके लिए कितनी चुनौतीपूर्ण होगी.

बसपा से सपा तक का शानदार सफर

इंद्रजीत सरोज मंझनपुर सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं और बसपा सरकार में तीन बार मंत्री भी रहे. 2017 की लहर को छोड़ दें, तो 1995 से अब तक इस सीट पर उनका वर्चस्व कायम रहा है.  सपा में आने के बाद वे अखिलेश यादव के सबसे भरोसेमंद दलित चेहरों में से एक बन गए हैं. नेता प्रतिपक्ष की रेस में भी उनका नाम प्रमुखता से चला था जो उनकी पार्टी के भीतर कद को दर्शाता है.

बीजेपी की रणनीति: सवर्ण और लोध वोटों पर टिकी आस

बीजेपी के लिए यह सीट हमेशा से कठिन रही है. बीजेपी का मुख्य फोकस अपने कोर वोट बैंक (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) के साथ-साथ लोध और अन्य पिछड़ी जातियों को एकजुट रखना है. बीजेपी नेताओं का दावा है कि वे अपने संगठनात्मक ढांचे और कार्यकर्ताओं के बल पर 2027 में इस सीट पर विजय प्राप्त करेंगे. हालांकि जानकारों का मानना है कि बीजेपी को न सिर्फ दलित वोटों में सेंधमारी करनी होगी बल्कि एक ऐसा चेहरा उतारना होगा जो इंद्रजीत सरोज के व्यक्तिगत प्रभाव को टक्कर दे सके.

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 पत्रकारों की राय

स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, 2027 का मुकाबला सीधा सपा और बीजेपी के बीच होगा. लेकिन इंद्रजीत सरोज को हराना इतना आसान नहीं होगा.  एक बड़ा फैक्टर 70,000 मतदाताओं के नाम कटने की चर्चा भी है, जो चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकता है.  फिलहाल, सियासी गलियारों में इंद्रजीत सरोज को अपर हैंड माना जा रहा है. विशेषकर कौशांबी संसदीय सीट पर मिली बड़ी जीत के बाद उनके कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर है.