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वाराणसी में MLC चुनाव क्यों हारी बीजेपी? समझिए पीछे की असली वजह

यूपी तक के विशेष शो 'आज का यूपी' में जानिए वाराणसी एमएलसी चुनाव में बीजेपी की करारी हार, संगठन की कमियों और समाजवादी पार्टी की काउंटिंग-डेटा रणनीति से जुड़ी तीन बड़ी खबरें.

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यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में राज्य की राजनीति और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ी तीन बड़ी खबरों का विशेष विश्लेषण किया गया है. इस एपिसोड में मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में बीजेपी की करारी हार, इस पराजय के पीछे संगठन की उदासीनता व जमीनी तैयारी की कमी जैसे मुख्य कारणों, और मतगणना के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की सक्रियता व कार्यकर्ताओं की मुस्तैदी से जुड़े सियासी संदेशों को  लेकर चर्चा की गई है.

शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव में समाजवादी पार्टी का बड़ा उलटफेर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के नतीजे भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़े झटके के रूप में सामने आए हैं. शिक्षक और स्नातक खंड की इन सीटों पर बीजेपी को 2020 के मुकाबले कहीं अधिक करारी हार का सामना करना पड़ा है. शिक्षक सीट पर बीजेपी पिछले चुनाव में करीब 936 वोटों से हारी थी. लेकिन इस बार हार का यह अंतर बढ़कर 5,000 से अधिक वोटों हो गया है. वहीं स्नातक सीट पर भी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ने पहले राउंड से ही भारी बढ़त बना ली. बीजेपी इस प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में अपनी छह में से पांच सीटों पर पिछड़ गई और गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर ही बमुश्किल 360 वोटों के अंतर से अपनी इज्जत बचा पाई. इस चुनाव को बीजेपी बैलेट पेपर पर अपनी पकड़ और ताकत दिखाने के एक बड़े संदेश के रूप में देख रही थी. लेकिन नतीजे पूरी तरह उलट साबित हुए.

हार के आंतरिक कारण: जमीनी स्तर पर संगठन की कमजोरी और अति-आत्मविश्वास

वाराणसी जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर बीजेपी की इस अप्रत्याशित हार के पीछे कई जमीनी कारण खुलकर सामने आए हैं. पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज है कि संगठन और उम्मीदवार लंबे समय से नए वोटर बनाने की कवायद में सुस्त रहे. नेता इस मुगालते में रहे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तूफानी दौरे और हेलीकॉप्टर प्रचार से ही नैया पार लग जाएगी. इसके उलट, समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी पिछले पांच-छह वर्षों से लगातार धरातल पर सक्रिय रहकर काम कर रहे थे. इसके अलावा शिक्षित और संभ्रांत मतदाताओं के बीच यूजीसी (UGC) जैसे मुद्दे और स्थानीय स्तर पर संवाद की कमी ने भी पार्टी के वोट शेयर को गहरा झटका दिया, जिससे यह साबित हुआ कि केवल बड़े चेहरो के भरोसे चुनावी वैतरणी पार नहीं की जा सकती.

मतगणना पर सपा का कड़ा पहरा और अखिलेश यादव की रणनीति

वाराणसी में मतगणना के दौरान चले लंबे घटनाक्रम और प्रशासनिक देरी के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की सक्रियता और रणनीतिक मुस्तैदी चर्चा का केंद्र बन गई. जब काउंटिंग में पेच फंस रहे थे, तब अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने कार्यकर्ताओं को सख्त निर्देश दिए कि कोई भी मतगणना स्थल तब तक नहीं छोड़ेगा जब तक जीत का प्रमाण पत्र हाथ में न आ जाए. सपा कार्यकर्ताओं ने रातभर डेरा डालकर भोजन, पानी और आवश्यक व्यवस्थाओं के साथ कड़ा पहरा दिया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव और मतगणना के दौरान सपा की यह आक्रामक तैयारी और एक-एक इंच जमीन के लिए लड़ने की जिद्द ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी ऊर्जा भर दी है और यह बीजेपी के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती का संकेत है.

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