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मायावती ने आकाश आनंद को संगठन की प्रमुख जिम्मेदारियों को क्यों हटाया? ये है 'असली' कहानी

'आज का यूपी' में जानिए बीएसपी में आकाश आनंद को लगे झटके की इनसाइड स्टोरी, 2027 चुनाव के लिए NDA का 300+ सीटों का फॉर्मूला और इंडिया गठबंधन में 'जीत के फॉर्मूले' पर सपा-कांग्रेस का रुख.

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Mayawati and Akash Anand (Photo: AI)
Mayawati and Akash Anand
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यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' में हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं. इस अंक की पहली बड़ी खबर बहुजन समाज पार्टी में मचे राजनीतिक घमासान और मायावती द्वारा अपने भतीजे आकाश आनंद को 'इमैच्योर' बताकर पद से हटाए जाने के फैसले पर केंद्रित है. दूसरी बड़ी खबर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की 2027 विधानसभा चुनाव के लिए संभावित सीट शेयरिंग रणनीति से जुड़ी है, जिसमें बीजेपी 300 सीटों पर खुद लड़ने का मन बना रही है. वहीं, तीसरी बड़ी खबर इंडिया गठबंधन की अंदरूनी राजनीति और कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे पर चल रही बयानबाजी और जीत के नए फॉर्मूले पर आधारित है.

मायावती ने आकाश आनंद को बताया 'इमैच्योर', बसपा में हलचल

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने एक बार फिर पार्टी के अंदर बड़ा फेरबदल करते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद को संगठन की प्रमुख जिम्मेदारियों से अलग कर दिया है. मायावती ने आकाश आनंद को राजनीतिक रूप से 'अपरिपक्व' (इमैच्योर) करार दिया है. पार्टी की अहम सांगठनिक बैठक में मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला देते हुए मायावती ने स्पष्ट किया कि जब तक आकाश आनंद पूरी तरह परिपक्व नहीं हो जाते, तब तक उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देना विरोधियों के साम-दाम-दंड-भेद के हथकंडों से पार्टी को हानि पहुंचा सकता है.

गौरतलब है कि इससे पहले भी 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान सीतापुर रैली में आक्रामक भाषण के बाद मायावती ने आकाश को उनके पद और उत्तराधिकारी की भूमिका से हटा दिया था. हालांकि, बाद में माफी मांगने पर उनकी वापसी हुई थी. बीएसपी से जुड़े जानकारों का मानना है कि मायावती पार्टी के भीतर अपने अलावा किसी अन्य नेता के उभार या ज्यादा मीडिया हाइप को पसंद नहीं करती हैं. फिलहाल लोकसभा और राज्यसभा में शून्य पर पहुंच चुकी बसपा के सामने 2027 के चुनाव में अपने अस्तित्व और युवा वोट बैंक को संभाले रखने की बड़ी चुनौती है.

NDA की सीट शेयरिंग का फॉर्मूला: 300 सीटों पर बीजेपी, सहयोगियों के पाले में 70-80 सीटें?

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे का खाका तैयार किया जा रहा है. सूत्रों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से भारतीय जनता पार्टी लगभग 300 सीटों पर अपने चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरने की योजना बना रही है. इसके अतिरिक्त, लगभग 25 से 30 सीटें ऐसी हो सकती हैं जहां प्रत्याशी तो बीजेपी के होंगे लेकिन सिंबल सहयोगी दल का इस्तेमाल किया जाएगा.

बाकी बची 70 से 80 सीटें गठबंधन के प्रमुख सहयोगियों- राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी), अपना दल (सोनेलाल), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और निषाद पार्टी के बीच बांटी जा सकती हैं. हालांकि, ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद के बीच कई सीटों को लेकर परस्पर दावेदारी भी देखने को मिल रही है. माना जा रहा है कि बीजेपी नेतृत्व इस पूरे सीट शेयरिंग फॉर्मूले को नवंबर से दिसंबर के बीच अंतिम रूप दे देगा.

कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे पर जारी रस्साकशी

दूसरी ओर, विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन में भी सीटों के बंटवारे को लेकर नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 100 सीटों के दावों को खारिज करते हुए कहा कि अभी सीटों पर कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है और कांग्रेस को कोई भी हलके में न ले. उन्होंने कांग्रेस को देश की सबसे पुरानी और संघर्षशील पार्टी बताते हुए सम्मानजनक समझौते की बात कही.

वहीं, दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि गठबंधन का लक्ष्य सीटों की गिनती नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी को हराना है. अखिलेश यादव ने कहा, "जीत की शेयरिंग ही सीट शेयरिंग है." जो प्रत्याशी या पार्टी जिस सीट पर बीजेपी को हराने की क्षमता रखेगी, उसे ही टिकट दिया जाएगा. दोनों ही प्रमुख दल आगामी चुनाव में बीजेपी को पटखनी देने के लिए अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में लगे हैं.

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