कौन हैं IAS अभय सिंह, जिन पर BJP के बागी MLC देवेंद्र प्रताप सिंह की शिकायत पर हो गया बड़ा एक्शन!
उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी अभय सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. गोरखपुर-फैजाबाद खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव पर्यवेक्षक के तौर पर उनकी नियुक्ति पर बीजेपी के बागी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने सवाल उठाए थे.
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IAS Abhay Singh News: उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी अभय सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. गोरखपुर-फैजाबाद खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव पर्यवेक्षक के तौर पर उनकी नियुक्ति पर बीजेपी के बागी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने सवाल उठाए थे. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर अभय सिंह को इस जिम्मेदारी से हटाने की मांग की थी. अब चुनाव आयोग ने उनकी जगह 2009 बैच के आईएएस अधिकारी प्रकाश बिंदु को जिम्मेदारी सौंप दी है. यह बदलाव मतगणना से ठीक पहले हुआ. इस घटनाक्रम के बाद अभय सिंह का प्रशासनिक करियर और साल 2019 में कथित अवैध खनन घोटाले की जांच के दौरान उनके आवास पर हुई CBI की छापेमारी फिर चर्चा में आ गई है.
2007 बैच के IAS अधिकारी हैं अभय सिंह
अभय सिंह साल 2007 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और फिलहाल राजस्व परिषद के सदस्य के तौर पर कार्यरत हैं. अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान वह बुलंदशहर और फतेहपुर जैसे जिलों में जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. हालांकि, उनकी पहचान प्रशासनिक पदों पर तैनाती के साथ-साथ साल 2019 में सामने आए कथित अवैध खनन मामले से भी जुड़ी रही है. उस समय वह बुलंदशहर के जिलाधिकारी थे. CBI ने खनन से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में उनके आवास पर छापेमारी की थी. इस कार्रवाई के दौरान उनके घर से 47 लाख रुपये की नकदी बरामद होने की बात सामने आई थी. इसी वजह से उनका नाम उस समय काफी चर्चा में रहा था.
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क्या था कथित अवैध खनन घोटाला?
यह मामला साल 2012 से 2016 के बीच उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान हुए कथित अवैध खनन से जुड़ा था. CBI इस मामले की जांच कर रही थी और इसी सिलसिले में प्रदेश के कई शहरों में छापेमारी की गई थी. इनमें लखनऊ, फतेहपुर, आजमगढ़, इलाहाबाद, नोएडा, गोरखपुर और देवरिया जैसे स्थान शामिल थे. उस दौरान जिन आईएएस अधिकारियों के आवास पर छापेमारी हुई, उनमें बी. चंद्रकला, विवेक और अभय सिंह के नाम भी सामने आए थे. आरोप था कि फतेहपुर के जिलाधिकारी रहते हुए अभय सिंह के कार्यकाल में खनन पट्टों के आवंटन में कथित गड़बड़ी हुई थी. हालांकि, छापेमारी या आरोपों के आधार पर किसी को दोषी ठहराया नहीं जा सकता. उपलब्ध जानकारी में इस मामले के अंतिम नतीजे का विवरण नहीं है.
बागी MLC ने नियुक्ति पर क्यों उठाए सवाल?
गोरखपुर-फैजाबाद खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अभय सिंह को चुनाव पर्यवेक्षक बनाए जाने के बाद बीजेपी के बागी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताई. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर अभय सिंह को पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से हटाने की मांग की थी. शिकायत में साल 2019 के कथित अवैध खनन मामले का हवाला दिया गया था. देवेंद्र प्रताप सिंह ने चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उनकी नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया. इस शिकायत का मुख्य आधार वही पुराना मामला था, जिसमें CBI ने जांच के दौरान अभय सिंह के आवास पर छापेमारी की थी. इस तरह चुनाव पर्यवेक्षक की नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर सवाल उठे.
मतगणना से पहले बदली गई जिम्मेदारी
चुनाव आयोग ने अभय सिंह को गोरखपुर-फैजाबाद खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से हटा दिया है. उनकी जगह 2009 बैच के आईएएस अधिकारी प्रकाश बिंदु को नियुक्त किया गया है. यह बदलाव मतगणना से ठीक पहले हुआ, जिससे मामला और चर्चा में आ गया. देवेंद्र प्रताप सिंह की शिकायत और अभय सिंह के पुराने रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठने लगे. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि आयोग ने केवल शिकायत के कारण ही यह फैसला लिया. आयोग के निर्णय के पीछे की पूरी वजह को लेकर अलग से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.
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अभय सिंह को हटाने के फैसले के 3 अहम पहलू
इस पूरे घटनाक्रम को तीन प्रमुख पहलुओं से समझा जा सकता है. पहला, अभय सिंह का प्रशासनिक कार्यकाल और उनका वर्तमान पद. दूसरा, साल 2019 में कथित अवैध खनन मामले की जांच के दौरान उनके आवास पर CBI की छापेमारी और नकदी बरामद होने की खबर. तीसरा, चुनाव पर्यवेक्षक के तौर पर उनकी नियुक्ति पर देवेंद्र प्रताप सिंह की आपत्ति और इसके बाद जिम्मेदारी में बदलाव. फिलहाल अभय सिंह की जगह प्रकाश बिंदु को जिम्मेदारी दी गई है.
