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यूपी चुनाव में बीजेपी से कितनी सीट की डिमांड करेंगे राजभर-निषाद और अनुप्रिया पटेल? समझिए 'सीट शेयरिंग' का गणित

यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में जानिए 2027 चुनाव से पहले एनडीए के 4 सहयोगियों-आरएलडी, अपना दल एस, सुभासपा और निषाद पार्टी के सीट शेयरिंग फार्मूले का पूरा vishleshan. क्या कमजोर दिख रही भाजपा से ज्यादा सीटें वसूल पाएंगे सहयोगी?

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OP Rajbhar, CM Yogi and Sanjay Nishad
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यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' राज्य की दिनभर की सबसे बड़ी और राजनीतिक रूप से अहम खबरों का गहराई से विश्लेषण करता है. आज के इस खास शो में हम उत्तर प्रदेश की तीन सबसे बड़ी खबरों पर चर्चा कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात बिछने लगी है और हालिया सी-वोटर व वोट वाइब्स के सर्वे के बाद सियासी तपिश काफी बढ़ गई है. आज के शो की पहली खबर भाजपा और उसके चार सहयोगी दलों (आरएलडी, अपना दल एस, निषाद पार्टी और सुभासपा) के बीच सीटों के बंटवारे की पेचीदा खींचतान पर केंद्रित है जहां सहयोगी दल ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं और भाजपा 75 से 90 सीटों का फार्मूला तलाश रही है. दूसरी खबर में बात संजय निषाद के उस सख्त रुख की होगी जिसमें उन्होंने 'आरक्षण नहीं तो गठबंधन नहीं' का दबाव बनाते हुए 32 सीटों पर दावा ठोका है. वहीं तीसरी खबर में हम बात करेंगे जयंत चौधरी की आरएलडी और अनुप्रिया पटेल की अपना दल एस के उन दबावों और रणनीति की जो पश्चिम से लेकर पूर्वांचल तक भाजपा के लिए एक बड़ा टिकट मैनेजमेंट चैलेंज खड़ा कर रही हैं.

2027 के सर्वे और भाजपा का '4 सहयोगी' फार्मूला

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आए वोट वाइब्स और सी-वोटर के सर्वे ने यूपी के सियासी समीकरणों को बेहद दिलचस्प बना दिया है. सर्वे के रुझानों में समाजवादी पार्टी का पलड़ा मजबूत दिखने के बाद भाजपा के भीतर और उसके गठबंधन में हलचल तेज हो गई है. 2022 के चुनाव में भाजपा के पास केवल दो सहयोगी (अपना दल एस और निषाद पार्टी) थे जिन्हें कुल 34 सीटें दी गई थीं. लेकिन इस बार एनडीए के बेड़े में चार दल शामिल हैं-जयंत चौधरी की आरएलडी और ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा भी अब भाजपा के साथ हैं.

2022 में अखिलेश यादव ने राजभर को 17 और जयंत चौधरी को 33 सीटें (कुल 50 सीटें) दी थीं. अब ये दोनों दल भाजपा के पाले में हैं और अपनी पुरानी हिस्सेदारी से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं. भाजपा नेतृत्व दिल्ली से लेकर लखनऊ तक इस पेंच को सुलझाने में जुटा है. माना जा रहा है कि भाजपा इस बार अपने सहयोगियों को 75 से 90 सीटें तक दे सकती है और खुद 328 से 335 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना रही है. हालांकि भाजपा की कोशिश सहयोगियों को मुख्य रूप से 'सी-ग्रेड' यानी अपनी हारी हुई सीटें देने की है.

संजय निषाद का 'आरक्षण' दांव और राजभर की अंदरूनी घेराबंदी

सीटों के बंटवारे के बीच निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने भाजपा पर भारी दबाव बनाना शुरू कर दिया है. 'आरक्षण नहीं तो गठबंधन नहीं' का नारा देते हुए संजय निषाद इस बार 32 सीटों की सीधी मांग कर रहे हैं. हालांकि 2022 के कम स्ट्राइक रेट पर संजय निषाद का तर्क है कि भाजपा ने उन्हें सीटें और उम्मीदवार अपने दिए थे जिसके चलते नुकसान हुआ. इस बार वे भाजपा की उन हारी हुई सीटों पर भी दावा ठोक रहे हैं जहां भाजपा कभी नहीं जीती.

दूसरी तरफ सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर हालांकि सार्वजनिक तौर पर यह कह रहे हैं कि भाजपा जो सीटें देगी उस पर लड़ेंगे. लेकिन अंदरखाने उनकी मांग भी 20 से 25 सीटों की है. राजभर का मानना है कि उनके पास अपना दल (एस) से कम वोट बैंक नहीं है. ऐसे में भाजपा के लिए राजभर और उनके बेटे को एडजस्ट करने के साथ-साथ निषाद पार्टी की मांगों को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है.

पश्चिम में जयंत का दबाव और अनुप्रिया पटेल का केंद्रीय कैबिनेट कनेक्शन

पश्चिमी यूपी में भाजपा के लिए सबसे बड़ा टिकट मैनेजमेंट का संकट आरएलडी के कारण खड़ा हो सकता है. पिछली बार सपा के साथ 33 सीटों पर लड़ने वाली आरएलडी इस बार भी पश्चिम की मजबूत सीटों पर दावा ठोक रही है जो पारंपरिक रूप से भाजपा का गढ़ रही हैं. ऐसे में यदि भाजपा पश्चिम में आरएलडी को ज्यादा सीटें देती है तो पार्टी के अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं में नाराजगी का खतरा है. वहीं आरएलडी पूर्वांचल की भी कुछ सीटों पर अपनी नजरें गड़ाए हुए है.

दूसरी ओर अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) जो लंबे समय से भाजपा की सबसे भरोसेमंद सहयोगी रही है, इस बार अधिक सीटों की मांग कर रही है. चर्चा है कि सीटों के इस तालमेल का असर केवल राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आने वाले समय में केंद्रीय कैबिनेट विस्तार, एमएलसी और राज्यसभा सीटों के बंटवारे पर भी पड़ेगा. अनुप्रिया पटेल के बढ़ते राजनीतिक कद के साथ क्या उन्हें केंद्र में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलेगा. यह भी इस गठबंधन की सौदेबाजी का एक मुख्य बिंदु बना हुआ है.

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